कश्मीर की बेटी दरख्शां भट ने जिनेवा में रखा भारत की विकास यात्रा का पक्ष


कश्मीर की एक महिला की आवाज़ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जम्मू-कश्मीर और भारत की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। कश्मीर वूमन्स ऑर्गनाइजेशन की अध्यक्ष दरख्शां हसन भट ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डिजिटल बदलाव, वित्तीय समावेशन और महिलाओं तथा ग्रामीण आबादी के लिए पैदा हो रहे नए अवसरों पर अपने विचार रखे।

दरख्शां भट की इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूदगी को जम्मू-कश्मीर की महिलाओं के लिए एक अहम उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में भारत में हो रहे डिजिटल परिवर्तन का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीकी तरक्की का फायदा समाज के हर तबके तक पहुंचना जरूरी है। खास तौर पर महिलाओं, ग्रामीण इलाकों और कमजोर वर्गों को विकास की इस प्रक्रिया में पीछे नहीं छूटना चाहिए।

जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के मंच से बोलते हुए उन्होंने भारत में डिजिटल व्यवस्था के विस्तार और वित्तीय सेवाओं तक लोगों की बढ़ती पहुंच को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल साधनों और वित्तीय अवसरों का इस्तेमाल समाज के उन तबकों को सशक्त बनाने के लिए भी किया जाना चाहिए, जो लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं।

दरख्शां भट ने ग्रामीण समुदायों की जरूरतों और महिलाओं की भागीदारी को भी अपने संबोधन का अहम हिस्सा बनाया। उनका कहना था कि किसी भी मुल्क की तरक्की उस वक्त ज्यादा मायने रखती है, जब उसका फायदा समाज के कमजोर और दूरदराज हिस्सों तक पहुंचे। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों में आगे बढ़ने के अवसर मिलना सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।

कश्मीर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची दरख्शां भट की यह पहल इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़ी महिलाओं और ग्रामीण समाज की उम्मीदों को वैश्विक मंच पर रखने का अवसर हासिल किया। कश्मीर में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी लगातार चर्चा का विषय रही है और ऐसे मंचों पर स्थानीय अनुभवों को सामने रखने से क्षेत्र की जमीनी आवाज को व्यापक पहचान मिलती है।

उनके संबोधन में डिजिटल परिवर्तन को केवल तकनीकी बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए नए अवसर पैदा करने के माध्यम के रूप में पेश किया गया। वित्तीय समावेशन के जरिए महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और विकास की प्रक्रिया में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जाता है।

दरख्शां भट की जिनेवा यात्रा ने यह भी दिखाया कि जम्मू-कश्मीर की महिलाएं अब स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी बात रखने की क्षमता और अवसर हासिल कर रही हैं। कश्मीर की सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाली एक महिला द्वारा भारत के विकास, डिजिटल बदलाव और महिला सशक्तीकरण से जुड़े पहलुओं को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर रखना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

उनका संदेश साफ था कि विकास की असल तस्वीर तभी मुकम्मल होगी, जब महिलाएं, ग्रामीण आबादी और कमजोर तबके उसकी बराबर की हिस्सेदार बनें। जिनेवा में उठी यह आवाज कश्मीर से निकलकर दुनिया तक पहुंची और भारत की विकास यात्रा में समावेशी भागीदारी की जरूरत को रेखांकित कर गई।

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