बिजबिहाड़ा प्रीमियर लीग पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय क्रिकेट कैलेंडर में अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रही है। छठे सीजन में प्रदेश के विभिन्न इलाकों से टीमों की भागीदारी इस बात की तरफ इशारा करती है कि जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर क्रिकेट का दायरा लगातार फैल रहा है। अलग-अलग जिलों और कस्बों से आने वाले खिलाड़ी इस मंच पर अपनी काबिलियत दिखाने के साथ-साथ बेहतर खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव भी हासिल कर रहे हैं।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर परवेज रसूल ने लीग की शुरुआत को जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर की क्रिकेट के लिए एक अहम कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं नौजवान खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का मौका देती हैं। उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर लगातार मुकाबले आयोजित होने से खिलाड़ियों में न केवल तकनीकी क्षमता विकसित होती है, बल्कि दबाव में प्रदर्शन करने और मुकाबले की रणनीति समझने का हुनर भी पैदा होता है।
कश्मीर में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि नौजवानों की उम्मीदों और अरमानों से जुड़ा एक अहम मैदान भी है। गांवों और कस्बों में बड़ी तादाद में युवा क्रिकेट को अपने भविष्य के तौर पर देखते हैं। हालांकि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित मंच और लगातार प्रतिस्पर्धी मुकाबले नहीं मिल पाते। ऐसे में बिजबिहाड़ा प्रीमियर लीग जैसी प्रतियोगिताएं इन खिलाड़ियों के लिए एक अहम सीढ़ी साबित हो सकती हैं।
छठे सीजन में 16 टीमों की भागीदारी ने प्रतियोगिता के दायरे को और व्यापक बनाया है। इससे खिलाड़ियों को अलग-अलग इलाकों से आने वाली टीमों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा। ऐसे मुकाबलों में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर स्थानीय क्रिकेट प्रशिक्षकों और चयनकर्ताओं की नजर भी पड़ सकती है। यही वजह है कि इस तरह की लीग को जमीनी क्रिकेट के लिए एक अहम मंच माना जा रहा है।
बिजबिहाड़ा में आयोजित यह लीग इस लिहाज से भी अहम है कि इसे कश्मीर के जाने-पहचाने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी परवेज रसूल का समर्थन हासिल है। एक ऐसे क्रिकेटर की मौजूदगी और सरपरस्ती, जिसने भारतीय क्रिकेट के उच्चतम स्तर पर जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व किया है, स्थानीय खिलाड़ियों के लिए हौसले का सबब बनती है। नौजवान खिलाड़ियों को इससे यह पैगाम मिलता है कि स्थानीय मैदानों से निकलकर बड़े क्रिकेट मंचों तक पहुंचने का रास्ता मौजूद है।
जानकारों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट की मजबूत बुनियाद तैयार करने के लिए स्थानीय लीगों का नियमित आयोजन जरूरी है। जिला और कस्बा स्तर की प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में ही प्रतिस्पर्धी माहौल देती हैं। इससे उनकी फिटनेस, अनुशासन, खेल की समझ और मानसिक मजबूती में इजाफा होता है।
बिजबिहाड़ा प्रीमियर लीग के छठे सीजन का आगाज इसी उभरती क्रिकेट संस्कृति की एक तस्वीर पेश करता है। 16 टीमों की भागीदारी से न सिर्फ मुकाबलों में दिलचस्पी बढ़ेगी, बल्कि कई नए चेहरों को अपनी काबिलियत दिखाने का मौका भी मिलेगा। दक्षिण कश्मीर के इस इलाके में शुरू हुई यह क्रिकेट गतिविधि आने वाले दिनों में उन नौजवान खिलाड़ियों के लिए उम्मीद का रास्ता खोल सकती है, जो बड़े मंच पर जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन करने का ख्वाब देखते हैं।
कुल मिलाकर, बिजबिहाड़ा प्रीमियर लीग का छठा सीजन महज एक स्थानीय क्रिकेट प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कश्मीर में जमीनी खेल संस्कृति को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अगर ऐसे मंच लगातार मिलते रहें तो गांवों और कस्बों में छिपी क्रिकेट की प्रतिभाओं को तराशकर उन्हें जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की राह और हमवार हो सकती है।


0 टिप्पणियाँ