उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मानवीय पहल के लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भावना का परिचायक है। तंगधार में आयोजित इस शिविर ने यह भी दिखाया कि दूरदराज़ बस्तियों में रहने वाले लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए किस तरह कठिन परिस्थितियों में भी काम किया जा सकता है।
इस मेगा नेत्र शिविर की खास बात यह रही कि सीमावर्ती क्षेत्र में एक भूमिगत ऑपरेशन थिएटर तैयार कर मरीजों की आंखों की जटिल शल्य चिकित्सा की गई। सीमावर्ती इलाके की भौगोलिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच इस तरह की चिकित्सा व्यवस्था कायम करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा। चिकित्सकों ने स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मरीजों की जांच की और आवश्यकतानुसार उन्नत नेत्र शल्य चिकित्सा की।
ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में चिकित्सा दल ने करनाह और तंगधार के दूरदराज़ इलाकों से पहुंचे मरीजों का उपचार किया। इनमें ऐसे लोग भी शामिल रहे, जिनके लिए बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा तक पहुंच आसान नहीं थी। शिविर के जरिए उन्हें अपने ही इलाके के करीब विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हुआ, जिससे इलाज के लिए दूर शहरों का रुख करने की परेशानी कम हुई।
यह पहल ऑपरेशन सद्भावना की उस भावना को भी मजबूत करती है, जिसके तहत सीमावर्ती और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ जुड़ाव बढ़ाने तथा उन्हें विभिन्न नागरिक सुविधाओं में सहयोग देने पर जोर दिया जाता है। स्वास्थ्य सेवा इस प्रयास का एक अहम हिस्सा रही है और तंगधार का नेत्र शिविर इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
कश्मीर के पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में कई बस्तियां ऐसी हैं, जहां कठिन मौसम, लंबी दूरी और दुर्गम रास्तों के कारण विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच चुनौती बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर लगाए जाने वाले चिकित्सा शिविर लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आते हैं। तंगधार में 220 मरीजों की आंखों की रोशनी बहाल होना इसी मानवीय प्रयास का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।
ऑपरेशन दृष्टि के तहत किए गए इस प्रयास ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सरहद की कठिन परिस्थितियों के बीच भी आम लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा सकती है। तंगधार के मरीजों के लिए यह शिविर महज इलाज का केंद्र नहीं रहा, बल्कि उनके जीवन में नई उम्मीद और रोशनी लेकर आने वाली एक पहल बन गया।


0 टिप्पणियाँ