उन्होंने कहा कि कश्मीर की पहचान दुनिया भर में उसकी बेमिसाल प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़ों, झीलों, बागों और हसीन वादियों के लिए है, लेकिन इन तमाम खूबियों के साथ यहां की मेहमाननवाजी भी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। सैलानी यहां सिर्फ मंज़र देखने नहीं आता, बल्कि वह स्थानीय लोगों के व्यवहार, माहौल और उसे मिलने वाली सुविधाओं को भी अपनी यादों का हिस्सा बनाकर वापस लौटता है।
विश्व पर्यटन दिवस के कार्यक्रम में पर्यटन निदेशक ने पर्यटन से जुड़े तमाम लोगों से अपील की कि वे सेवा के स्तर को बेहतर बनाने को अपनी प्राथमिकता बनाएं। होटल, हाउसबोट, रेस्तरां, परिवहन, स्थानीय मार्गदर्शक और दूसरे पर्यटन सेवा प्रदाता सैलानियों के साथ जिस तरह पेश आते हैं, उससे कश्मीर की छवि बनती है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा अनुभव किसी सैलानी को दोबारा कश्मीर आने के लिए प्रेरित कर सकता है, जबकि खराब सेवा पूरे पर्यटन अनुभव को प्रभावित कर सकती है।
पर्यटन क्षेत्र में तेजी से बदलती तकनीक को लेकर भी उन्होंने अहम बात कही। उनका कहना था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक आने वाले समय में सेवा क्षेत्र के कई कामों को बदल सकती है। अगर पर्यटन से जुड़े लोग अपनी कार्यशैली, हुनर और सेवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं लाते तो तकनीकी बदलाव रोजगार के मौजूदा तौर-तरीकों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए कर्मचारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए बदलते दौर के मुताबिक अपनी कार्यकुशलता बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक को चुनौती के बजाय बेहतर सेवा का जरिया बनाया जा सकता है। अगर आधुनिक साधनों के साथ इंसानी मेहमाननवाजी और स्थानीय संस्कृति की गर्मजोशी को जोड़ा जाए तो सैलानियों को और बेहतर अनुभव दिया जा सकता है। कश्मीर की पारंपरिक मेहमाननवाजी को आधुनिक पर्यटन जरूरतों के साथ जोड़ना आने वाले समय में इस क्षेत्र के लिए अहम साबित हो सकता है।
इसी मौके पर पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम देने के लिए गुलमर्ग में पहले राष्ट्रीय पर्यटन टूर्नामेंट के आयोजन की घोषणा भी की गई। यह आयोजन पर्यटन विभाग की ओर से पूरी तरह प्रायोजित किया जाएगा। विभाग की योजना है कि इस राष्ट्रीय टूर्नामेंट को आगे चलकर अपने वार्षिक पर्यटन कैलेंडर का नियमित हिस्सा बनाया जाए।
गुलमर्ग कश्मीर के सबसे मशहूर पर्यटन स्थलों में शामिल है और साल भर देश-विदेश से सैलानी यहां पहुंचते हैं। गर्मियों में हरी-भरी ढलानें और सर्दियों में बर्फ से ढकी वादियां गुलमर्ग को अलग पहचान देती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन टूर्नामेंट का आयोजन खेल और पर्यटन को एक मंच पर लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इस आयोजन के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले प्रतिभागियों और मेहमानों को गुलमर्ग की खूबसूरती के साथ कश्मीर की संस्कृति और मेहमाननवाजी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। साथ ही इस तरह के आयोजन स्थानीय पर्यटन कारोबार के लिए भी नई गतिविधियां पैदा कर सकते हैं। होटल, परिवहन, खान-पान और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को आयोजन के दौरान अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद रहेगी।
पर्यटन विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों को वार्षिक कैलेंडर में शामिल करने की पहल से कश्मीर में पर्यटन को पूरे साल सक्रिय रखने की कोशिश को भी बल मिल सकता है। इससे सैलानियों को केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों तक सीमित रहने के बजाय खेल, संस्कृति और अन्य गतिविधियों से जुड़ने के मौके मिलेंगे।
विश्व पर्यटन दिवस पर दिया गया संदेश यही रहा कि कश्मीर की असली खूबसूरती सिर्फ इसकी वादियों और पहाड़ों में नहीं, बल्कि यहां के लोगों की मेहमाननवाजी में भी बसती है। सैलानी जब यहां से अच्छी यादें लेकर लौटता है तो वही कश्मीर का सबसे मजबूत परिचय बनता है। ऐसे में बेहतर सेवा, खुशनुमा बर्ताव और नए पर्यटन आयोजनों के जरिए कश्मीर को एक ऐसा गंतव्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जहां खूबसूरती के साथ मेहमान को सम्मान और यादगार तजुर्बा भी हासिल हो।


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