सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, खेतीबाड़ी जम्मू-कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और मौसम में होने वाले बदलाव, भारी बारिश, बर्फबारी, सूखा, बाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक परिस्थितियां किसानों की मेहनत और आमदनी पर सीधा असर डाल सकती हैं। ऐसे में फसल बीमा योजनाओं का मकसद किसानों को संभावित नुकसान की सूरत में वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों को विभिन्न जोखिमों से बीमा कवच दिया जाता है। वहीं मौसम आधारित फसल बीमा योजना में मौसम से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किसानों को राहत देने का प्रावधान है। जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में इन योजनाओं का लागू होना इस बात की तरफ इशारा करता है कि फसल जोखिम से निपटने के लिए बीमा व्यवस्था को केंद्र शासित प्रदेश के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 12.89 लाख से ज्यादा किसान इन बीमा योजनाओं के दायरे में हैं। यह कवरेज उन किसानों के लिए अहम है जिनकी रोजी-रोटी खेती पर निर्भर है और जिनके लिए एक मौसम की खराबी भी घर के आर्थिक हालात को प्रभावित कर सकती है। फसल को नुकसान पहुंचने की सूरत में बीमा दावे किसानों को तत्काल आर्थिक दबाव से कुछ हद तक राहत देने में मदद कर सकते हैं।
अब तक 221.71 करोड़ रुपये के बीमा दावों का भुगतान किया जा चुका है। यह रकम उन किसानों के लिए आर्थिक सहारे का जरिया बनी है जिन्हें फसल नुकसान का सामना करना पड़ा। खास तौर पर जम्मू-कश्मीर जैसे भौगोलिक और मौसम के लिहाज से विविध क्षेत्र में, जहां पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी कृषि क्षेत्रों तक अलग-अलग तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं, फसल जोखिम का प्रबंधन किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
किसानों के लिए बीमा सिर्फ नुकसान की भरपाई का जरिया नहीं, बल्कि खेती में भरोसा बनाए रखने का एक माध्यम भी है। जब किसान को यह यकीन हो कि प्राकृतिक जोखिम की सूरत में उसे बीमा सहायता मिल सकती है, तो खेतीबाड़ी में निवेश और उत्पादन को जारी रखने में सहूलियत हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर में इन योजनाओं का विस्तार किसानों तक सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर देखा जा सकता है। आने वाले वक्त में बीमा योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाना, किसानों को दावा प्रक्रिया से अवगत कराना और पात्र किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना इस व्यवस्था को और असरदार बनाने में मददगार हो सकता है।
इस तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए फसल जोखिम के खिलाफ आर्थिक सुरक्षा की एक अहम व्यवस्था बनकर सामने आई हैं, जिसके तहत अब तक लाखों किसान कवर हो चुके हैं और करोड़ों रुपये के दावों का भुगतान किया जा चुका है।


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