जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर में आयोजित प्रदर्शनी में कश्मीर से कुल 71 वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स पेश किए गए थे। इन प्रोजेक्ट्स में से आर्मी गुडविल स्कूल हाजिनार के विद्यार्थियों का प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए शीर्ष 15 प्रोजेक्ट्स की सूची में शामिल हुआ। इस उपलब्धि ने न सिर्फ स्कूल बल्कि हाजिनार और आसपास के इलाकों के लिए भी फख्र का मौका पैदा किया है।
इस प्रोजेक्ट को स्कूल की कक्षा 11वीं के विद्यार्थी ओबैद-उर-रहमान और कक्षा 10वीं के विद्यार्थी असद ज़हूर ने तैयार किया। दोनों विद्यार्थियों ने अपने मेंटर राशिद फरीद की रहनुमाई में इस वैज्ञानिक मॉडल पर काम किया। प्रोजेक्ट का मकसद कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी खतरनाक और जानलेवा गैस की मौजूदगी का समय रहते पता लगाना और उससे पैदा होने वाले खतरे को कम करने के लिए निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसके कारण बंद कमरों अथवा कम वेंटिलेशन वाले स्थानों में गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में इस तरह का डिटेक्टर-कम-एग्जॉस्टर मॉडल विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ के साथ-साथ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल की सोच को भी सामने लाता है।
स्कूल से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की कामयाबी विद्यार्थियों की मेहनत, उनके मेंटर की रहनुमाई और स्कूल प्रशासन के सहयोग का नतीजा है। प्रिंसिपल आफताब अहमद ख्वाजा ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई और उन्हें वैज्ञानिक गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस पूरी कोशिश को भारतीय सेना और भारती एयरटेल फाउंडेशन से मिले सहयोग ने भी मजबूती दी। आर्मी गुडविल स्कूलों के जरिए दूरदराज़ और सीमावर्ती इलाकों के बच्चों को तालीम के बेहतर मौके उपलब्ध कराने के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक, खेल और दूसरी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उनकी दिलचस्पी बढ़ाने पर भी तवज्जो दी जाती रही है।
हाजिनार के विद्यार्थियों की यह कामयाबी इस बात की मिसाल है कि अगर बच्चों को सही रहनुमाई, संसाधन और प्लेटफॉर्म हासिल हो, तो दूरदराज़ इलाकों से आने वाली नई नस्ल भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा सकती है। सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों ने जिस तरह रोज़मर्रा की सुरक्षा से जुड़े एक अहम मसले को वैज्ञानिक प्रोजेक्ट की शक्ल दी, वह उनकी रचनात्मक सोच और समस्या के हल की तलाश करने की सलाहियत को दर्शाता है।
स्थानीय स्तर पर इस उपलब्धि को स्कूल के लिए एक नई प्रेरणा के तौर पर देखा जा रहा है। टॉप-15 में जगह बनाना विद्यार्थियों के लिए महज़ एक पुरस्कार या चयन नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में विज्ञान और नवाचार के मैदान में आगे बढ़ने की एक नई राह भी खोल सकता है।
आर्मी गुडविल स्कूल हाजिनार के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि कश्मीर की नई नस्ल में मौजूद वैज्ञानिक हुनर और प्रतिभा को उजागर करती है। साथ ही यह पैगाम भी देती है कि सही प्लेटफॉर्म और हौसला-अफ़ज़ाई मिले तो दूरदराज़ पहाड़ी इलाकों के बच्चे भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान कायम कर सकते हैं।


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