कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों में शाहज़ाद अहमद की मुहिम, 13 साल में 100 से अधिक झीलों की खोज


कश्मीर के सोपोर से ताल्लुक रखने वाले ट्रेकर शाहज़ाद अहमद ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में 100 से अधिक अल्पाइन झीलों की खोज कर एक उल्लेखनीय साहसिक अभियान दर्ज किया है। पिछले 13 वर्षों से जारी उनका यह सफर ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले दर्रों और दूरदराज की झीलों तक पहुंचने के जुनून की मिसाल बन गया है। यह उपलब्धि महज सैर-सपाटे तक महदूद नहीं, बल्कि कठिन पहाड़ी इलाकों में लगातार खोज और ट्रैकिंग का नतीजा है।

शाहज़ाद अहमद का अल्पाइन झीलों की ओर यह सफर वर्ष 2013 में शुरू हुआ। उस दौरान उन्होंने पहलगाम से वारवन तक के ट्रेक में हिस्सा लिया। इसी अभियान ने उन्हें कश्मीर और लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद प्राकृतिक झीलों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों को करीब से जानने की तरफ मुतवज्जो किया। इसके बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग पर्वतीय क्षेत्रों का रुख किया और ऊंचाई पर स्थित झीलों तक पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक पूरे किए।

बीते वर्षों में शाहज़ाद ने कई ऐसे इलाकों की राह पकड़ी, जहां पहुंचना आम पर्यटकों के लिए आसान नहीं होता। ऊंचाई, बदलता मौसम, पथरीले रास्ते और सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने अपने साथियों के साथ इन अभियानों को जारी रखा। उनके लिए ये यात्राएं केवल प्राकृतिक खूबसूरती देखने का जरिया नहीं रहीं, बल्कि पहाड़ों को समझने और उनके दूरदराज हिस्सों तक पहुंचने का एक लगातार जारी सिलसिला बन गईं।

साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण को बढ़ावा देने की दिशा में भी शाहज़ाद अहमद की गतिविधियां सामने आती रही हैं। वर्ष 2020 में उन्होंने माउंटेन वॉरियर्स एडवेंचर क्लब की सह-स्थापना की। इस क्लब के जरिए साहसिक अभियानों, ट्रेकिंग और पहाड़ी इलाकों की खोज से जुड़े प्रयासों को एक संगठित रूप देने की कोशिश की गई। इससे उत्तरी कश्मीर के युवाओं के बीच एडवेंचर और ट्रेकिंग को लेकर दिलचस्पी बढ़ाने का भी अवसर मिला।

उनके अभियान का नया पड़ाव 31 अगस्त 2026 को नागेंद्र लेक्स अभियान के दौरान सामने आया। इस अभियान में उन्होंने कई ऊंचाई वाली झीलों तक पहुंच बनाई। इसी क्रम में बाराफसर झील भी शामिल रही, जो करीब 4,642 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई तक पहुंचना अपने आप में चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और रास्ते भी कठिन हो सकते हैं।

शाहज़ाद अहमद का यह सफर उत्तरी कश्मीर के लिए भी एक खास मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है। सोपोर जैसे इलाके से निकलकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाए और 100 से अधिक अल्पाइन झीलों तक पहुंच बनाई। उनकी यह यात्रा बताती है कि कश्मीर के युवाओं में सिर्फ पारंपरिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि साहसिक पर्यटन, ट्रेकिंग और पर्वतीय अन्वेषण के क्षेत्र में भी गहरी दिलचस्पी मौजूद है।

उनकी उपलब्धि को किसी महज पर्यटक अभियान या प्रचारात्मक दावे के तौर पर देखने के बजाय एक लंबे अरसे से जारी व्यक्तिगत और सामूहिक पर्वतीय अन्वेषण के रिकॉर्ड के रूप में देखा जा सकता है। वर्ष 2013 से शुरू हुआ यह सफर 2026 तक पहुंचते-पहुंचते 100 से अधिक अल्पाइन झीलों की खोज तक पहुंच गया है।

कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों में बिखरी इन झीलों तक पहुंचना न सिर्फ शारीरिक मजबूती बल्कि सब्र, तैयारी और बदलते मौसम के साथ तालमेल की भी मांग करता है। शाहज़ाद अहमद का 13 साल का यह सफर इसी निरंतरता की कहानी पेश करता है। सोपोर से शुरू हुई उनकी यह मुहिम अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक अपना दायरा बना चुकी है।

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