खेलो इंडिया रोडमैप के तहत जम्मू-कश्मीर की बड़ी तैयारी, 1,000–1,200 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य


जम्मू-कश्मीर में खेलों को नई रफ्तार देने और गांव-गांव से लेकर राष्ट्रीय व ओलंपिक स्तर तक खिलाड़ियों की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करने की दिशा में एक अहम पहल शुरू की गई है। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 2026 से 2031 तक के पांच वर्षीय ‘खेलो इंडिया’ रोडमैप के तहत करीब 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये की राशि हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस फंड का इस्तेमाल खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई प्रतिभाओं को तराशने और एक मुकम्मल स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए किया जाएगा।

इस सिलसिले में मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में पहली यूटी-स्तरीय समन्वय समिति की बैठक हुई, जिसमें पांच वर्षीय योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से गौर किया गया। बैठक का मकसद जम्मू-कश्मीर में खेल गतिविधियों को केवल बड़े शहरों और चुनिंदा मैदानों तक महदूद रखने के बजाय उन्हें हर जिले और दूरदराज इलाकों तक पहुंचाना है।

बैठक में युवा सेवा एवं खेल विभाग के आयुक्त सचिव डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने प्रस्तावित रोडमैप की रूपरेखा पेश की। योजना में खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग देने पर खास तवज्जो दी गई है।

प्रशासन की कोशिश है कि आने वाले पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में ऐसा खेल ढांचा तैयार हो, जहां किसी दूरदराज गांव के स्कूल में खेलने वाला बच्चा भी अपनी प्रतिभा के दम पर जिला, संभाग, राष्ट्रीय और आगे चलकर ओलंपिक स्तर तक पहुंचने का रास्ता तय कर सके। इसके लिए जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं को मजबूत करना इस रोडमैप का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

इस सिलसिले में सभी जिला उपायुक्तों (डीसी) को अपने-अपने जिलों के लिए विस्तृत खेल योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन जिला खेल योजनाओं को 15 सितंबर तक जमा किया जाना है। जिला स्तर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होने वाली ये योजनाएं आगे की व्यापक रणनीति की बुनियाद बनेंगी।

जिला-केंद्रित मॉडल के तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खेल प्रतिभाओं, मौजूदा मैदानों, प्रशिक्षण सुविधाओं और आवश्यक बुनियादी ढांचे का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद जरूरत के मुताबिक खेल मैदानों का विकास, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, उपकरणों की उपलब्धता और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर पैदा करने पर काम किया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर में पहले से ही क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो, वुशु, बैडमिंटन, तैराकी और विंटर स्पोर्ट्स समेत कई खेलों में युवाओं की दिलचस्पी बढ़ रही है। ऐसे में प्रस्तावित रोडमैप को इन खेल प्रतिभाओं को व्यवस्थित मंच देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

इस पहल का सबसे अहम पहलू यह है कि खेलों को महज प्रतियोगिताओं तक सीमित रखने के बजाय इसे एक पूर्ण खेल पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। यानी स्कूल के मैदान से शुरू होने वाली प्रतिभा की पहचान को बेहतर कोचिंग, जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण से जोड़ते हुए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया जाए।

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए यह पहल खास मायने रखती है। अगर जिला स्तर की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे खेलों में नई प्रतिभाओं को सामने आने का मौका मिलेगा और युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए बेहतर मंच हासिल होंगे।

कुल मिलाकर, 2026–31 का खेलो इंडिया रोडमैप जम्मू-कश्मीर में खेलों के लिए एक लंबी अवधि की रणनीति का संकेत देता है। 1,000–1,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से बुनियादी ढांचे, प्रतिभा विकास और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अब निगाहें जिला स्तर की योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हैं, क्योंकि यही योजनाएं तय करेंगी कि जम्मू-कश्मीर के स्कूलों और गांवों से निकलने वाली नई खेल प्रतिभाएं किस हद तक राष्ट्रीय और ओलंपिक मंच तक पहुंच पाती हैं।

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