कश्मीर के दूरदराज़ और सीमावर्ती इलाकों से निकलकर बड़े मुकाम हासिल करने वाले नौजवानों की कामयाबी इस बात का सबूत है कि प्रतिभा किसी इलाके की मोहताज नहीं होती। कुपवाड़ा के दूरदराज़ सीमावर्ती गांव अलूसा क्रालपोरा के रहने वाले और हाजीपीर एजीएस त्रेहगाम के पूर्व छात्र सुहैल अहमद खोजा ने जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (JKPSC) की चयन प्रक्रिया में कामयाबी हासिल कर प्लानिंग, डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग डिपार्टमेंट में असिस्टेंट डायरेक्टर (इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स) का पद हासिल किया है।
सुहैल की यह कामयाबी उनके परिवार और गांव के लिए फख्र का मौका होने के साथ-साथ सीमावर्ती कश्मीर के उन तमाम नौजवानों के लिए भी हौसले का पैगाम है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी कामयाबी की खास बात यह है कि यह सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की लगातार अकादमिक मेहनत और उपलब्धियों का नतीजा है।
सुहैल गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं और उन्होंने NET, SET, GATE और JRF जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की है। इन उपलब्धियों के बाद JKPSC के जरिए प्रशासनिक जिम्मेदारी हासिल करना उनके तालीमी सफर का एक अहम पड़ाव माना जा सकता है।
उनकी कहानी में हाजीपीर एजीएस त्रेहगाम की भूमिका भी खास महत्व रखती है। स्कूल किसी विद्यार्थी के लिए सिर्फ किताबों और इम्तिहानों की जगह नहीं होता, बल्कि यहीं से अनुशासन, आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा और बड़े लक्ष्य हासिल करने की सोच पैदा होती है। सुहैल का सफर दिखाता है कि सीमावर्ती इलाकों में बेहतर शिक्षा और सही मार्गदर्शन स्थानीय टैलेंट को बड़े मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अलूसा क्रालपोरा जैसे दूरदराज़ गांव से निकलकर JKPSC तक पहुंचना इस बात को भी उजागर करता है कि कश्मीर के बॉर्डर इलाकों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उसे सही अवसर, तालीम और मार्गदर्शन देने की है।
सुहैल का चयन Education-Led Nation Building की एक सकारात्मक मिसाल भी है। जब दूरदराज़ इलाकों के युवा उच्च शिक्षा हासिल कर प्रशासन और विकास से जुड़े पदों तक पहुंचते हैं, तो उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए नई राह खोलती है। इससे गांवों में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सकारात्मक करियर विकल्पों के प्रति भरोसा मजबूत होता है।
सुहैल अहमद खोजा की कामयाबी का पैगाम साफ है—दूरदराज़ इलाका किसी नौजवान की मंजिल तय नहीं करता; मजबूत इरादा, मेहनत और तालीम उसकी मंजिल बदल सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि सीमावर्ती कश्मीर के लिए सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि स्थानीय प्रतिभा और शिक्षा की ताकत का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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