कश्मीरी कानूनी विद्वान प्रो. डॉ. वासिक अब्बास डार की बड़ी उपलब्धि, लंदन में पढ़ाएंगे अंतरराष्ट्रीय कानून

 


श्रीनगर: कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले प्रख्यात कानूनविद् प्रो. (डॉ.) वासिक अब्बास डार ने अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर एक और अहम मुकाम हासिल किया है। उन्हें लंदन स्थित सेंटर फॉर ट्रांसनेशनल लीगल स्टडीज (CTLS) में शरद ऋतु 2026 सत्र के लिए अतिथि संकाय सदस्य के तौर पर चुना गया है। CTLS, जॉर्जटाउन लॉ से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय कानूनी अध्ययन केंद्र है और लंदन में इसका शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित होता है। CTLS की आधिकारिक संकाय सूची में डॉ. डार का नाम 2026 के शरद सत्र के संकाय सदस्य के तौर पर दर्ज है।

यह नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि CTLS दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कानून के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाने वाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय केंद्र है। यहां डॉ. डार अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता जैसे महत्वपूर्ण विषय पढ़ाएंगे। उनकी विशेषज्ञता में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून, निवेशक-राज्य मध्यस्थता और वाणिज्यिक मध्यस्थता शामिल हैं।

डॉ. वासिक अब्बास डार फिलहाल ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में सह-प्राध्यापक और सह-डीन के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल के सेंटर फॉर पोस्ट ग्रेजुएट लीगल स्टडीज में सह-निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उनका अकादमिक कार्य विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, निवेश कानून और निवेश विवादों के क्षेत्र में रहा है।

उनकी शैक्षणिक यात्रा भी काफी अंतरराष्ट्रीय रही है। उन्होंने सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून में एस.जे.डी. यानी कानून में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। इससे पहले उन्होंने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में एल.एल.एम. और पुणे विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी की वैश्विक शिक्षण फेलोशिप के तहत उन्होंने म्यांमार की यांगून यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून और निवेश मध्यस्थता जैसे विषय भी पढ़ाए।

डॉ. डार का अंतरराष्ट्रीय अकादमिक अनुभव यहीं तक महदूद नहीं है। उन्हें कॉर्नेल लॉ स्कूल, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में बर्जर एंड क्लार्क विजिटिंग रिसर्च स्कॉलर के तौर पर आमंत्रित किया गया था। इसके बाद 2018 में उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन के डिक्सन पून स्कूल ऑफ लॉ में विजिटिंग रिसर्चर के रूप में भी कार्य किया।

कानूनी शिक्षा के साथ-साथ डॉ. डार ने अदालतों और न्यायाधिकरणों में भी पेशेवर अनुभव हासिल किया है। उन्होंने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की विभिन्न अदालतों तथा न्यायाधिकरणों के समक्ष वकालत की है। भारत में उच्च-महत्व वाले अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता मामलों में उन्होंने न्यायाधिकरण सचिव और मध्यस्थता सहयोगी के तौर पर भी काम किया है। उनके शोध और लेख अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तथा प्रतिष्ठित संपादित पुस्तकों में प्रकाशित हुए हैं।

कश्मीर के लिए यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि घाटी से निकलने वाली प्रतिभाएं अब कानून, विज्ञान, तकनीक और दूसरे पेशेवर क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं। डॉ. डार की नई भूमिका कश्मीर की उस प्रतिभा को सामने लाती है, जो स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में अपनी विशेषज्ञता का परिचय दे रही है।

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