जम्मू-कश्मीर में रेल कनेक्टिविटी की कहानी आज एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। भारतीय रेलवे ने जम्मू तवी और श्रीनगर के बीच तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस को मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन उधमपुर के रास्ते ट्रेन नंबर 26407/26408 के रूप में चलेगी। मौजूदा दो वंदे भारत सेवाओं में लगातार फुल ऑक्यूपेंसी और बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
लेकिन इस तीसरी वंदे भारत के पीछे जम्मू-कश्मीर की रेल कनेक्टिविटी की एक लंबी और मुश्किल कहानी छुपी है। जम्मू शहर को उधमपुर और आगे कश्मीर घाटी से जोड़ने की जरूरत लगातार महसूस होती रही। अप्रैल 1983 में जम्मू-उधमपुर रेल लाइन की आधारशिला रखी गई। इसके बाद कश्मीर को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ने की महत्वाकांक्षी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना को 1994-95 में मंजूरी मिली।
सफर आसान नहीं था। पहाड़, गहरी घाटियां, कठिन भूगर्भीय परिस्थितियां और सैकड़ों सुरंगों-सेतुओं ने इस परियोजना को भारतीय रेलवे की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में शामिल कर दिया। 2005 में जम्मू-उधमपुर रेल सेक्शन पूरा हुआ। इसके बाद कश्मीर घाटी में रेल कनेक्टिविटी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ी। 2009 में काजीगुंड-बारामूला सेक्शन पूरा हुआ, जिससे घाटी के भीतर रेल सेवा मजबूत हुई। 2013 में बनिहाल-काजीगुंड सेक्शन खुला और अगले साल 2014 में उधमपुर-कटरा रेल लाइन शुरू हुई।
सबसे मुश्किल हिस्सा कटरा-बनिहाल रहा। लंबे इंतजार के बाद फरवरी 2024 में बनिहाल-संगलदान सेक्शन चालू हुआ और दिसंबर 2024 तक कटरा की ओर अंतिम महत्वपूर्ण काम भी पूरा हो गया। आखिरकार 6 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 272 किलोमीटर लंबे USBRL को राष्ट्र को समर्पित किया। इसी मौके पर कटरा-श्रीनगर के बीच दो वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाओं को हरी झंडी दिखाई गई। इस परियोजना में चिनाब पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज और अंजी खड्ड का भारत का पहला केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग कारनामे भी शामिल हैं।
इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को दोनों वंदे भारत सेवाओं को जम्मू तवी तक बढ़ाया गया और 20-कोच की क्षमता दी गई। नियमित सेवा 2 मई से शुरू हुई। करीब 266-269 किलोमीटर के जम्मू तवी-श्रीनगर सफर ने जम्मू और कश्मीर के बीच तेज रेल संपर्क को नई रफ्तार दी।
अब तीसरी वंदे भारत 26407/26408 की मंजूरी इस सफर का नया अध्याय है। रेलवे के इस विस्तार से आम मुसाफिर, विद्यार्थी, कारोबारी और सैलानी—सबनै के लिए जम्मू से श्रीनगर तक सफर के और विकल्प बढ़ेंगे। जम्मू-कश्मीर में रेल नेटवर्क का यह विस्तार केवल ट्रेन बढ़ाने की बात नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी, पर्यटन, व्यापार और आधुनिक बुनियादी ढांचे के लगातार मजबूत होते जाने की कहानी भी है।

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