जम्मू-कश्मीर के तैराकी सितारे मूसा परवेज मलिक ने दिखाया दम, 50 मीटर फ्रीस्टाइल हीट में हासिल किया दूसरा स्थान

 


राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर के उभरते हुए युवा तैराक मूसा परवेज मलिक ने अपनी शानदार प्रदर्शन से घाटी के खेल जगत में नई उम्मीद जगाई है। 52वीं राष्ट्रीय एक्वाटिक चैंपियनशिप 2026 के दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर जूनियर स्विमिंग दल का प्रतिनिधित्व कर रहे मूसा ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल हीट में 28.47 सेकंड का समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया।

मूसा का यह प्रदर्शन केवल एक रेस तक सीमित उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनकी लगातार मेहनत, अनुशासन और सुनियोजित प्रशिक्षण की कहानी भी जुड़ी है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता से पहले मूसा ने 14 दिनों के गहन प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया, जहां उन्हें सीनियर कोच विकास मग्गोत्रा के मार्गदर्शन में अपनी तकनीक, स्पीड और रेसिंग क्षमता को निखारने का अवसर मिला। यह प्रशिक्षण शिविर जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल के सहयोग से आयोजित किया गया था।

50 मीटर फ्रीस्टाइल जैसी छोटी दूरी की रेस में हर सेकंड बेहद अहम होता है। इसमें तैराक की शुरुआती डाइव, स्ट्रोक तकनीक, सांस लेने का नियंत्रण और अंतिम टच तक की गति परिणाम तय करती है। ऐसे में 28.47 सेकंड का समय मूसा की तैयारी और प्रतिस्पर्धी क्षमता को दर्शाता है। हीट में दूसरा स्थान हासिल करना उनके लिए आगे की बड़ी चुनौतियों का रास्ता भी खोलता है।

मूसा की सफलता के पीछे कोचिंग और लगातार अभ्यास की अहम भूमिका रही है। 14 दिन के कैंप के दौरान खिलाड़ियों को केवल शारीरिक फिटनेस पर ही नहीं, बल्कि तकनीकी सुधार, रेस रणनीति और मानसिक तैयारी पर भी ध्यान दिया गया। यही structured coaching अब जम्मू-कश्मीर में तैराकी जैसे खेलों में नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का आधार बनती दिखाई दे रही है।

जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट और फुटबॉल के साथ-साथ अब तैराकी में भी युवा खिलाड़ी अपनी पहचान बना रहे हैं। मूसा परवेज मलिक का प्रदर्शन इस बात की मिसाल है कि यदि युवा खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण, अनुभवी कोचिंग और निरंतर अभ्यास का माहौल मिले, तो घाटी की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहरा सकती हैं।

मूसा के लिए यह उपलब्धि मंजिल नहीं, बल्कि एक नए सफर की शुरुआत है। 50 मीटर फ्रीस्टाइल में हासिल किया गया दूसरा स्थान उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा। उनके इस प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर के युवा तैराकों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश दिया है—मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के दम पर घाटी की प्रतिभा राष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकती है।

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