आर्मी गुडविल स्कूल राघविन चौंटिवारी: 26 वर्षों से कश्मीर के युवाओं के सपनों को दे रहा नई उड़ान, कुपवाड़ा के माछिल में बना शिक्षा और बदलाव की मिसाल

 

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का माछिल सेक्टर भौगोलिक दृष्टि से बेहद दुर्गम और नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट स्थित सीमावर्ती क्षेत्र है। कठिन पहाड़ी भूगोल, सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच यहां के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यापक अवसरों तक पहुंच लंबे समय तक चुनौती रही है। ऐसे वातावरण में आर्मी गुडविल स्कूल राघविन चौंटिवारी स्थानीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

चौंटिवारी, माछिल सेक्टर, जिला कुपवाड़ा में स्थित यह विद्यालय भारतीय सेना की पहल के तहत स्थापित किया गया था। स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और शैक्षणिक अवसरों के साथ सामुदायिक विकास को मजबूत करना है। स्कूल अब 26 वर्षों से अधिक समय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है।

समय के साथ AGS चौंटिवारी ने अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाया है। यहां CBSE मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम, conceptual learning और holistic development पर जोर दिया जाता है। उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और डिजिटल लर्निंग टूल्स के माध्यम से आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

स्कूल में पढ़ाई के साथ खेल, शारीरिक प्रशिक्षण, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी महत्व दिया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में teamwork, leadership, confidence और discipline विकसित करना है। स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर कारगिल विजय दिवस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, मातृ दिवस, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस और विश्व रक्तदाता दिवस जैसी गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों का उल्लेख है।

विद्यार्थियों की उपलब्धियां भी स्कूल की शैक्षणिक भूमिका को सामने रखती हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), आर्मी पब्लिक स्कूल (APS), NEET और कराटे में उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को ‘Student Achievers’ के रूप में प्रदर्शित किया गया है। इनमें जैनब मजीद, शायस्ता नाज़िर, मसारत नाज़, बिलाल मजीद शेख और रिफत रसूल जैसे नाम शामिल हैं। कई विद्यार्थियों ने कराटे में भी उपलब्धियां हासिल की हैं।

स्कूल की भूमिका केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है। खेल, कला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देती हैं। इससे दूरदराज क्षेत्र के बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने क्षेत्र की सीमाओं से आगे बढ़कर बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित होते हैं।

इसी सोच को ‘सही रास्ता’ जैसी युवा संवाद पहल आगे बढ़ाती है। ऐसे सत्रों में विद्यार्थियों को इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समझने, अलग-अलग दृष्टिकोणों पर विचार करने, तथ्यों का विश्लेषण करने और जिम्मेदारी के साथ अपनी राय बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं में awareness, critical thinking और social responsibility को मजबूत करना है।

स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान कुल छात्र संख्या, फैकल्टी संख्या और alumni की संख्या का सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए इनकी संख्या का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। इसी तरह स्कूल की कोई आधिकारिक राष्ट्रीय या जिला-स्तरीय ranking प्रकाशित नहीं मिली है। ऐसे में इसकी उपलब्धियों को ranking के बजाय इसके लंबे शैक्षणिक योगदान, student achievers और विभिन्न गतिविधियों के आधार पर प्रस्तुत करना अधिक तथ्यात्मक होगा।

माछिल जैसे दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्र में AGS चौंटिवारी ने शिक्षा को आत्मविश्वास, अवसर, खेल, तकनीक, नेतृत्व और बेहतर भविष्य से जोड़ा है। 26 वर्षों से अधिक की शैक्षणिक यात्रा में यह संस्थान स्थानीय बच्चों के सपनों को नई दिशा देने और उन्हें व्यापक अवसरों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

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