पढ़ेगा कश्मीर, बढ़ेगा कश्मीर: चिनार बुक फ़ेस्टिवल में एलजी मनोज सिन्हा की शिरकत


श्रीनगर की ख़ूबसूरत वादी इन दिनों सिर्फ़ अपनी फ़ितरती हुस्न की वजह से नहीं, बल्कि इल्म, अदब और तहज़ीब की महफ़िलों की वजह से भी चर्चा में है। तीसरे चिनार बुक फ़ेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की शिरकत ने इस अदबी आयोजन को नई अहमियत बख्शी। इस मौक़े पर उन्होंने किताबों की अहमियत, पढ़ने की आदत और नौजवान नस्ल को इल्म से जोड़ने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

बुक फ़ेस्टिवल में देश के मुख़्तलिफ़ हिस्सों से आए प्रकाशकों, लेखकों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। किताबों के रंग-बिरंगे स्टॉल, बच्चों के लिए ख़ास गतिविधियाँ, साहित्यिक गोष्ठियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन की ख़ास पहचान बने। बड़ी तादाद में छात्र-छात्राओं और युवाओं की मौजूदगी ने यह साबित किया कि जम्मू-कश्मीर में पढ़ने और सीखने की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने फ़ेस्टिवल का दौरा करते हुए अलग-अलग स्टॉलों का जायज़ा लिया और प्रकाशकों तथा लेखकों से मुलाक़ात की। उन्होंने कहा कि किताबें इंसान की सोच को वुसअत देती हैं, समाज को बेहतर बनाती हैं और नई नस्ल को सही राह दिखाने का सबसे मज़बूत ज़रिया हैं। उनके मुताबिक़, पढ़ने की आदत सिर्फ़ इल्म हासिल करने तक महदूद नहीं होती, बल्कि यह एक ज़िम्मेदार और जागरूक समाज की तामीर में भी अहम किरदार अदा करती है।

एलजी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को नई सोच, नई तहरीरों और दुनिया भर के इल्मी ख़ज़ाने से जोड़ते हैं। इससे नौजवानों में रचनात्मकता, तन्क़ीदी सोच और समाज के लिए बेहतर योगदान देने का जज़्बा पैदा होता है।

चिनार बुक फ़ेस्टिवल सिर्फ़ किताबों की नुमाइश नहीं, बल्कि इल्म और तहज़ीब का एक ऐसा संगम बनकर उभरा है जहाँ हर उम्र के लोगों को सीखने और समझने का मौक़ा मिल रहा है। बच्चों के लिए कहानी सत्र, लेखकों से मुलाक़ात, साहित्यिक चर्चाएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को और भी दिलचस्प बना दिया। स्थानीय लेखकों और युवा रचनाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अहम मंच मिला।

शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजन जम्मू-कश्मीर में ज्ञान-आधारित समाज की बुनियाद को और मज़बूत करते हैं। जब नौजवान किताबों की दुनिया से जुड़ते हैं तो उनमें सकारात्मक सोच, नई कल्पनाएँ और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी का एहसास बढ़ता है। यही वजह है कि पुस्तक मेलों और साहित्यिक कार्यक्रमों को आधुनिक और प्रगतिशील समाज की पहचान माना जाता है।

स्थानीय विद्यार्थियों ने भी इस आयोजन को बेहद प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि एक ही जगह पर अलग-अलग विषयों की किताबें, प्रसिद्ध लेखकों से बातचीत और नई जानकारियाँ हासिल करने का मौक़ा मिलना उनके लिए यादगार अनुभव है। कई छात्रों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें नियमित रूप से पढ़ने और नई किताबों की तरफ़ आकर्षित करते हैं।

चिनार बुक फ़ेस्टिवल इस बात की भी मिसाल पेश करता है कि जम्मू-कश्मीर अब शिक्षा, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों के नए दौर की तरफ़ बढ़ रहा है। यहाँ साहित्य, कला और ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश की नई पहचान एक ज्ञान-समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से सशक्त समाज के रूप में उभर रही है।

कुल मिलाकर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की इस अदबी महफ़िल में मौजूदगी ने यह पैग़ाम दिया कि जम्मू-कश्मीर में किताबों, शिक्षा और बौद्धिक विकास को नई रफ़्तार देने की कोशिशें जारी हैं। चिनार बुक फ़ेस्टिवल जैसे आयोजन न सिर्फ़ पढ़ने की संस्कृति को मज़बूत कर रहे हैं, बल्कि युवाओं को इल्म, रचनात्मकता और बेहतर मुस्तक़बिल की जानिब बढ़ने की नई राह भी दिखा रहे हैं।

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