आतंकवाद पर फिर भारत को दोष! क्या पाकिस्तान अपनी नाकामियों से नज़रें चुरा रहा है?


इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बार फिर देश में बढ़ती आतंकवादी घटनाओं के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में आतंकवाद के पीछे "भारत का हाथ" है और इसे एक "सोची-समझी साज़िश" क़रार दिया। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग में 90,000 से अधिक लोगों की क़ुर्बानी दी है, लेकिन इसके बावजूद मुल्क को नए सुरक्षा ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में जब भी आंतरिक सुरक्षा हालात बिगड़ते हैं, तब भारत पर इल्ज़ाम लगाने की सियासत फिर से सामने आ जाती है। उनका कहना है कि ऐसे बयान अक्सर घरेलू सुरक्षा चुनौतियों और प्रशासनिक नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश के तौर पर देखे जाते हैं।

पिछले कई वर्षों में पाकिस्तान के भीतर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठनों और दूसरे हथियारबंद गुटों की गतिविधियों में इज़ाफ़ा हुआ है। इन संगठनों ने सुरक्षा बलों, सरकारी ठिकानों और आम नागरिकों को निशाना बनाया है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा लगातार चुनौती के दौर से गुज़र रही है।

दूसरी ओर, भारत लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की ज़मीन से संचालित आतंकवादी संगठन, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे गुट शामिल हैं, सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। भारत का कहना है कि इन संगठनों के ख़िलाफ़ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए किसी भी देश को अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, चरमपंथी नेटवर्क और हिंसक संगठनों के ख़िलाफ़ ठोस रणनीति अपनानी होती है। उनका कहना है कि बाहरी आरोपों के साथ-साथ घरेलू सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करना भी उतना ही ज़रूरी है।

शहबाज़ शरीफ़ का ताज़ा बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान को सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों और बढ़ते आतंकी हमलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यह बयान एक बार फिर दक्षिण एशिया में आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बहस का विषय बन गया है।

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