सरकारी सूत्रों के मुताबिक़, स्कूलों की लाइब्रेरियों की समीक्षा के दौरान ऐसी 126 किताबों की पहचान की गई, जिनकी सामग्री छात्रों पर नकारात्मक असर डाल सकती थी। इसके बाद उपराज्यपाल ने इन पुस्तकों को सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरियों से हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए। प्रशासन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान इल्म, तरक़्क़ी और बेहतर मुस्तक़बिल की बुनियाद होते हैं। ऐसे में किसी भी ऐसी सामग्री के लिए कोई जगह नहीं हो सकती, जो नौजवानों को गुमराह करने या हिंसा और कट्टर सोच की तरफ़ ले जाने का ख़तरा पैदा करे।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में ज़िम्मेदारी निभाने में कोताही बरतने वाले कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने साफ़ किया है कि शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्कूल लाइब्रेरियों का नियमित निरीक्षण किया जाए और यह यक़ीनी बनाया जाए कि विद्यार्थियों को केवल वही साहित्य उपलब्ध हो, जो ज्ञान, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक मूल्यों को मज़बूत करे।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों में उपलब्ध साहित्य का सीधा असर बच्चों की सोच और व्यक्तित्व पर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि छात्रों को ऐसी किताबें पढ़ने का अवसर मिले, जो उन्हें तालीम, अमन, इंसानियत, आपसी भाईचारे और मुल्क की तरक़्क़ी में योगदान देने के लिए प्रेरित करें। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही युवाओं को बेहतर अवसरों और उज्ज्वल भविष्य की तरफ़ ले जा सकती है।
प्रशासन ने यह भी दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था को और मज़बूत बनाने के लिए लगातार क़दम उठाए जा रहे हैं। स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, डिजिटल शिक्षा, बेहतर बुनियादी ढाँचा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करना है, जहाँ हर छात्र सुरक्षित वातावरण में अपनी प्रतिभा को निखार सके और समाज की तरक़्क़ी में सकारात्मक भूमिका निभा सके।
विश्लेषकों का कहना है कि नौजवान किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताक़त होते हैं। उन्हें हिंसा, नफ़रत और भटकाव से दूर रखकर शिक्षा, हुनर और रोज़गार की राह पर आगे बढ़ाना किसी भी विकसित समाज की पहचान है। इसी सोच के साथ प्रशासन शिक्षा संस्थानों को ऐसे स्थान के रूप में विकसित करने पर ज़ोर दे रहा है, जहाँ किताबें ज्ञान का स्रोत बनें, न कि वैचारिक टकराव या कट्टरता का माध्यम।
प्रशासन ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को यह भी हिदायत दी है कि भविष्य में लाइब्रेरियों के लिए पुस्तकों का चयन पूरी सावधानी और निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए। साथ ही समय-समय पर समीक्षा की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी, ताकि छात्रों तक केवल रचनात्मक, प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद सामग्री ही पहुँचे।


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