माहिरीन का मानना है कि यह सूरत-ए-हाल अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि बरसों से जारी उन नीतियों का नतीजा है जिनमें मुख़्तलिफ़ दहशतगर्द तंजीमों को पनाह, सहूलियत और असर-ओ-रसूख़ हासिल रहा। यही वजह है कि आज वही तंजीमें पाकिस्तान के अंदर अमन-ओ-अमान के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन चुकी हैं। कई इलाक़ों में सुरक्षाबलों, सरकारी इदारों और आम शहरी आबादी पर हमलों में इज़ाफ़ा देखने को मिला है, जिससे अवाम के अंदर ख़ौफ़ और बेयक़ीनी का माहौल पैदा हुआ है।
रिपोर्ट इस बात की तरफ़ भी इशारा करती है कि पाकिस्तान में सक्रिय कई इंतिहापसंद और हथियारबंद गिरोह लगातार अपनी मौजूदगी मज़बूत कर रहे हैं। इन तंजीमों की वजह से न सिर्फ़ बेगुनाह नागरिक अपनी जान गंवा रहे हैं, बल्कि मुल्क की मआशी हालत, तालीमी निज़ाम और तरक़्क़ी के दूसरे अहम शोबे भी बुरी तरह मुतास्सिर हो रहे हैं। आए दिन होने वाले धमाके, फ़ायरिंग और हिंसक वारदातों ने आम ज़िंदगी को मुश्किल बना दिया है।
दिफ़ाई और सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि जब किसी मुल्क में दहशतगर्द नेटवर्क को लंबे अरसे तक पनाह मिलती है, तो आख़िरकार वही नेटवर्क उस मुल्क की सलामती और इस्तिहकाम के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन जाते हैं। पाकिस्तान की मौजूदा हालत इसी हक़ीक़त की अक्कासी करती है, जहाँ दहशतगर्दी का दायरा अब सीमावर्ती इलाक़ों से निकलकर शहरों और आबादी वाले क्षेत्रों तक फैल चुका है।
माहिरीन के मुताबिक़ पाकिस्तान की यह रैंकिंग सिर्फ़ उसके अंदरूनी हालात तक महदूद नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे दक्षिण एशिया के अमन और इस्तिहकाम पर भी पड़ता है। दहशतगर्द तंजीमों की सरगर्मियाँ, सरहदी तनाव और इंतिहापसंद सोच का फैलाव पूरे इलाके के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी लगातार दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ सख़्त और बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की ज़रूरत पर ज़ोर देती रही है।
सियासी तजज़ियाकारों का कहना है कि अगर किसी मुल्क की ज़मीन पर इंतिहापसंद तंजीमें खुले तौर पर फलती-फूलती रहें, तो उसका सबसे बड़ा नुक़सान आख़िरकार उसी मुल्क के अवाम को उठाना पड़ता है। पाकिस्तान में बढ़ती नागरिक मौतें, सुरक्षा बलों पर हमले और लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था इसी बात का सबूत मानी जा रही हैं कि दहशतगर्दी किसी एक सरहद तक महदूद नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज को अपनी गिरफ़्त में ले लेती है।
ग्लोबल टेररिज़्म इंडेक्स 2026 की यह रिपोर्ट एक बार फिर इस हक़ीक़त को उजागर करती है कि दहशतगर्दी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त करना या उसे पनाह देना आख़िरकार उसी मुल्क के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन जाता है। पाकिस्तान का दुनिया का सबसे अधिक दहशतगर्दी प्रभावित देश बनना इस बात का इशारा माना जा रहा है कि इंतिहापसंदी की नीति न केवल क्षेत्रीय अमन को नुक़सान पहुँचाती है, बल्कि अपने ही अवाम की जान, माल और मुस्तक़बिल को भी ख़तरे में डाल देती है। माहिरीन का मानना है कि स्थायी अमन, तरक़्क़ी और ख़ुशहाली का रास्ता केवल दहशतगर्दी के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस, जवाबदेही और इंतिहापसंद नेटवर्क के ख़ात्मे से ही होकर गुज़रता है।


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