जानकारी के अनुसार पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा भी महिलाओं के अलग विंग बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। इन संगठनों की यह रणनीति साफ दिखाती है कि आतंकवाद की जमीन अब उनके पैरों तले से खिसक चुकी है। जब नौजवानों ने बंदूक की राह छोड़कर तालीम, कारोबार और रोजगार का रास्ता चुन लिया, तो पाकिस्तान अब महिलाओं को ढाल बनाकर अपने नापाक इरादों को आगे बढ़ाना चाहता है।
वुछिव, यह वही पाकिस्तान है जिसने दशकों तक कश्मीर के नाम पर खून-खराबे की राजनीति की, लेकिन हर बार उसे नाकामी ही हाथ लगी। आज घाटी में हालात बदल चुके हैं। स्कूलों और कॉलेजों में रौनक है, खेल के मैदान आबाद हैं, सैलानी बड़ी तादाद में कश्मीर का रुख कर रहे हैं और नौजवान अपने बेहतर भविष्य के सपने बुन रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की यह नई चाल उसकी मायूसी और बेचैनी का सबूत मानी जा रही है।
मुकामी लोगों का कहना है कि अब कश्मीर का अवाम आतंकवाद के पुराने दौर में लौटना नहीं चाहता। लोगों ने अपनी आंखों से वह दौर देखा है जब हिंसा और बंदूक ने हजारों परिवारों की खुशियां छीन ली थीं। इसलिए अब किसी भी कीमत पर आतंकवाद को दोबारा जगह नहीं दी जाएगी। यही वजह है कि पाकिस्तान के तमाम प्रचार और उकसावे के बावजूद घाटी के लोग शांति और विकास के साथ खड़े नजर आते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मजबूत काउंटर-टेरर ग्रिड पाकिस्तान की हर साजिश को नाकाम करने में सक्षम है। पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों के नेटवर्क को लगातार कमजोर किया गया है। घुसपैठ के प्रयासों पर रोक लगी है और आतंकी फंडिंग के रास्तों पर भी सख्ती से कार्रवाई की गई है। इसी कारण पाकिस्तान अब नए-नए तरीके अपनाने पर मजबूर हो गया है, लेकिन उसके इरादों को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं है।
दरअसल, महिलाओं के नाम पर ऐसा नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश न सिर्फ कश्मीर की सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ है, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा और उनकी भूमिका का भी खुला अपमान है। महिलाएं समाज निर्माण, शिक्षा और परिवार की मजबूती का प्रतीक हैं, लेकिन पाकिस्तान उन्हें अपनी आतंक की फैक्ट्री का हिस्सा बनाना चाहता है। यह दिखाता है कि आतंकवाद को जिंदा रखने के लिए पाकिस्तान किस हद तक गिर सकता है।
कश्मीर में लौटती शांति और सामान्य हालात पाकिस्तान को रास नहीं आ रहे हैं। मगर हकीकत यह है कि घाटी का अवाम अब बदल चुका है। लोग अमन चाहते हैं, तरक्की चाहते हैं और अपने बच्चों के लिए बेहतर कल चाहते हैं। पाकिस्तान की यह नई साजिश भी उसकी पुरानी चालों की तरह नाकाम साबित होगी, क्योंकि अब कश्मीर में बंदूक की आवाज नहीं, बल्कि अमन, तालीम और तरक्की की गूंज सुनाई दे रही है। पाकिस्तान की आतंक फैक्ट्री चाहे जितनी कोशिश कर ले, कश्मीर के लोगों ने साफ कर दिया है कि उनका भविष्य शांति और विकास के साथ है, आतंकवाद के साथ नहीं।


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