पाक फ़ौज की कार्रवाईयों के विरोध में श्रीनगर में प्रदर्शन, इंसाफ़ की उठी मांग


पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाक फ़ौज की तरफ़ से कथित तौर पर किए जा रहे ज़ुल्म, जबर और बेगुनाह नागरिकों की हत्याओं के ख़िलाफ़ श्रीनगर में एक पुरअमन एहतिजाजी मुज़ाहिरा देखने को मिला। एसोसिएशन ऑफ़ टेरर विक्टिम्स ऑफ़ कश्मीर (ATVK) के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में भारतीय जम्मू-कश्मीर के कई परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

यह एहतिजाज श्रीनगर के सोनवर इलाके में स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) कार्यालय के क़रीब आयोजित किया गया, जहां मुज़ाहिरीन ने PoJK के लोगों के साथ अपनी मुकम्मल यकजहती का इज़हार किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर उठा रखे थे, जिन पर PoJK में इंसानी हुकूक़ की कथित पामाली और पाक फ़ौज की कार्रवाईयों के ख़िलाफ़ नारे दर्ज थे।

मुज़ाहिरे में शामिल लोगों का कहना था कि PoJK के आम नागरिक लंबे अरसे से बुनियादी हुकूक़, इंसाफ़ और बेहतर ज़िंदगी की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को दबाने के लिए ताक़त का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि PoJK में हालात का संज्ञान लिया जाए और वहां के लोगों को इंसाफ़ दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कश्मीर के दोनों हिस्सों के लोगों के बीच इंसानी रिश्ते और जज़्बाती जुड़ाव मौजूद है। उनका कहना था कि जब भी PoJK में किसी नागरिक के साथ ज़्यादती होती है, उसका दर्द भारतीय जम्मू-कश्मीर के लोगों तक भी पहुंचता है। इसी वजह से श्रीनगर में यह पुरअमन एहतिजाज आयोजित किया गया ताकि मज़लूम परिवारों के साथ हमदर्दी और समर्थन का पैग़ाम दिया जा सके।

मुज़ाहिरे के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दुनिया भर में इंसानी हुकूक़ की बात करता है, लेकिन PoJK में रहने वाले लोगों को वही बुनियादी अधिकार हासिल नहीं हैं जिनका दावा इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करता है। उन्होंने कहा कि PoJK में हालिया घटनाओं ने पाकिस्तान की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और वैश्विक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा बढ़ रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि PoJK में हालात और वहां होने वाले आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में श्रीनगर का यह प्रदर्शन न सिर्फ़ PoJK के लोगों के साथ यकजहती का पैग़ाम देता है, बल्कि क्षेत्र में मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर चल रही बहस को भी मज़बूती प्रदान करता है।

यह पुरअमन एहतिजाज इस बात की निशानदेही करता है कि कश्मीर के लोगों के बीच इंसानी हमदर्दी और इंसाफ़ की तलब सरहदों से ऊपर है। मुज़ाहिरीन ने आखिर में दुआ की कि PoJK के अवाम को अमन, इंसाफ़ और उनके बुनियादी हुकूक़ हासिल हों तथा क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता हमवार हो।

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