मुकामी लोगों का कहना है कि जो फौज सरहदों की हिफाजत के लिए बनाई गई थी, वही अब अपनी ही आवाम के लिए डर और खौफ का सबब बन चुकी है। लोगों का आरोप है कि घरों पर रात के वक्त छापे मारे जा रहे हैं, नौजवानों को परेशान किया जा रहा है और महिलाओं की इज्जत तक महफूज नहीं रही। वुछिव, यह वही इलाका है जहां के लोगों ने बरसों से अपने हक, बेहतर जिंदगी और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग की है, मगर जवाब में उन्हें अक्सर दबाव और सख्ती का सामना करना पड़ा है।
जून 2026 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी कई ऐसे आरोप सामने आए, जिनमें कहा गया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया। अब जब पीओजेके में इस महीने के आखिर में चुनावी प्रक्रिया का शेड्यूल जारी होने की उम्मीद है, तब ऐसे घटनाक्रम लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर रहे हैं। आवाम पूछ रही है कि अगर घर और परिवार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो लोकतंत्र और इंसाफ की बातें आखिर कितनी मायने रखती हैं।
इलाके के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की इज्जत किसी भी समाज की पहचान होती है। अगर किसी भी कार्रवाई के दौरान महिलाओं को डर, अपमान या असुरक्षा का सामना करना पड़े, तो यह सिर्फ एक परिवार नहीं बल्कि पूरे समाज के आत्मसम्मान पर चोट होती है। यही वजह है कि इस घटना के बाद पीओजेके के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के बीच नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।
मुकामी अवाम का यह भी कहना है कि पाकिस्तान की फौज अब सुरक्षा बल से ज्यादा एक ऐसे ताकतवर समूह की तरह नजर आती है, जो अपने ही लोगों को दबाने के लिए हर तरीका अपनाने को तैयार है। कई लोग इसे "टेरर आर्मी" तक कहने लगे हैं, क्योंकि उनके मुताबिक डर और दहशत के जरिए शासन चलाने की कोशिश की जा रही है। यह स्थिति उस सोच को और मजबूत करती है कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी जंग अब किसी बाहरी ताकत से नहीं, बल्कि अपनी ही आवाम से चल रही है।
पीओजेके के लोग आज बेहतर शिक्षा, रोजगार, आजादी से बोलने का हक और सम्मानजनक जिंदगी चाहते हैं। लेकिन जब उनकी आवाज को दबाने के लिए छापेमारी, धमकी और कथित तौर पर महिलाओं की बेइज्जती जैसे आरोप सामने आते हैं, तो लोगों का भरोसा कमजोर होना लाजिमी है। आवाम अब यह सवाल उठा रही है कि क्या उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी या फिर उन्हें हमेशा खौफ और खामोशी में जीने के लिए मजबूर किया जाएगा।
कश्मीर की जुबान में कहा जाए तो, "येह ज़ुल्म कब तक चलान? अवाम छुख अब जवाब मांगान।" यानी यह जुल्म आखिर कब तक चलेगा, अब लोग जवाब मांग रहे हैं। पीओजेके की सड़कों से उठ रही यह आवाज साफ बता रही है कि लोग सम्मान, इंसाफ और अपने अधिकारों के लिए पहले से ज्यादा जागरूक हो चुके हैं।


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