एलओसी पर अमन से बदली उत्तर कश्मीर की तस्वीर, सरहदी इलाकों में पर्यटन ने भरी नई उड़ान


उत्तर कश्मीर के सरहदी इलाकों में इन दिनों एक नई रौनक देखने को मिल रही है। एलओसी पर कायम अमन और सुकून ने यहां के पर्यटन को नई पहचान दी है। साल 2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम के बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात लगातार बेहतर हुए हैं, जिसका सीधा फायदा पर्यटन उद्योग को मिल रहा है। कभी जो इलाके केवल सुरक्षा कारणों से चर्चा में रहते थे, आज वही अपनी खूबसूरती, मेहमाननवाजी और प्राकृतिक नजारों के लिए दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर खींच रहे हैं।

केरन, माछिल, टीटवाल, तंगधार, गुरेज और करनाह जैसे खूबसूरत सरहदी इलाके अब पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। इन वादियों की हसीन वादियां, बर्फ से ढके पहाड़, बहती नदियां और स्थानीय लोगों की गर्मजोशी सैलानियों के दिलों को छू रही है। मुकामी लोग भी इस बदलाव से बेहद खुश नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि बरसों बाद उनके गांवों में फिर से रौनक लौटी है और कारोबार के नए रास्ते खुल रहे हैं।

इस साल उत्तर कश्मीर के इन सीमावर्ती इलाकों में चार लाख तीस हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे हैं, जिनमें अकेले कुपवाड़ा जिले में करीब तीन लाख सैलानियों की आमद दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात की गवाही देता है कि अब लोग इन इलाकों को पूरी तरह सुरक्षित और आकर्षक पर्यटन स्थलों के रूप में देख रहे हैं।

पर्यटन में इस बढ़ोतरी से स्थानीय युवाओं और परिवारों को भी बड़ा फायदा हो रहा है। होमस्टे, ट्रांसपोर्ट, होटल और खानपान से जुड़े कारोबार तेजी से बढ़ रहे हैं। कई नौजवान, जो पहले रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करते थे, अब अपने ही गांवों में रोजगार के अवसर पा रहे हैं। कोई होमस्टे चला रहा है, तो कोई टैक्सी सेवा और कोई स्थानीय हस्तशिल्प व पारंपरिक उत्पादों को सैलानियों तक पहुंचा रहा है।

मुकामी लोगों का कहना है कि अमन का यह माहौल उनकी जिंदगी में नई उम्मीद लेकर आया है। पहले जहां सरहद के आसपास रहने वाले लोग अनिश्चितता के साये में जीते थे, वहीं अब वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और आर्थिक तरक्की के सपने देख रहे हैं। वुछिव, आज इन इलाकों में सिर्फ सुकून ही नहीं, बल्कि खुशहाली की एक नई दास्तान भी लिखी जा रही है।

प्रशासन भी इन खूबसूरत पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विभिन्न सांस्कृतिक और पर्यटन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जबकि एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इन स्थलों की जानकारी देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाई जा रही है। इसका मकसद इन अनछुए और मनमोहक इलाकों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक खास पहचान दिलाना है।

उत्तर कश्मीर के सरहदी इलाकों में पर्यटन का यह बढ़ता कदम केवल आर्थिक विकास की कहानी नहीं है, बल्कि यह अमन, सामान्य स्थिति और लोगों की नई उम्मीदों का प्रतीक भी है। यह बदलाव दिखाता है कि जब वादियों में शांति कायम होती है, तो तरक्की के नए रास्ते अपने आप खुल जाते हैं। आज पूरी दुनिया कश्मीर की इन खूबसूरत सरहदी वादियों को नए नजरिए से देख रही है और यही बदलता हुआ कश्मीर आने वाले कल की सबसे बड़ी पहचान बन रहा है।

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