कुपवाड़ा का केरन बना नया पर्यटन हब, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिली नई उड़ान


सरहद पर बसा एक दूर-दराज़ और सीमित सुविधाओं वाला केरन गाँव, आज अमन-ओ-अमान और बेहतर माहौल की बदौलत पर्यटन का नया मरकज़ बनकर उभरा है। कुपवाड़ा ज़िले का ये ख़ूबसूरत इलाक़ा अब रोज़ाना तक़रीबन दो हज़ार सैलानियों का इस्तक़बाल कर रहा है।

किशनगंगा नदी के किनारे बसा केरन अपनी बेमिसाल प्राकृतिक ख़ूबसूरती, हरे-भरे पहाड़ों, साफ़ फ़िज़ा और स्थानीय मेहमाननवाज़ी की वजह से सैलानियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। जहाँ कभी गिनती के लोग ही पहुँचा करते थे, वहीं अब हर रोज़ देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी तादाद में पर्यटक यहाँ पहुँच रहे हैं।

इस बढ़ती पर्यटक आमद ने केरन की स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूँक दी है। गाँव के कई घर अब होमस्टे में तब्दील हो चुके हैं, जहाँ मेहमानों को कश्मीरी तहज़ीब और स्थानीय ज़ायकों का अनुभव कराया जा रहा है। इसके साथ ही छोटे-छोटे रेस्तराँ, चाय की दुकानें, टैक्सी सेवाएँ और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े कारोबार भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

इलाके के नौजवान, जो कभी रोज़गार के लिए बाहर जाने को मजबूर थे, अब अपने ही गाँव में नए अवसर तलाश रहे हैं। कई युवाओं ने पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबार शुरू किए हैं, जबकि महिलाएँ भी स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और होमस्टे के ज़रिए परिवार की आमदनी में अहम योगदान दे रही हैं। इससे पूरे गाँव में आर्थिक गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटकों की बढ़ती तादाद ने गाँव की तस्वीर बदल दी है। पहले जहाँ कारोबार के सीमित साधन थे, वहीं अब साल भर रोज़गार के नए मौके पैदा हो रहे हैं। इससे लोगों की आमदनी बढ़ी है और बच्चों की तालीम, बेहतर रहन-सहन और भविष्य को लेकर उम्मीदें भी मज़बूत हुई हैं।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि केरन का यह बदलाव इस बात की मिसाल है कि जब किसी इलाक़े में अमन, स्थिरता और विकास का माहौल बनता है, तो वहाँ की स्थानीय आबादी को सीधे तौर पर उसका फ़ायदा मिलता है। प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है, जिससे स्थानीय पहचान और विरासत को नई पहचान मिल रही है।

सैलानियों का कहना है कि केरन की वादियाँ, यहाँ के लोग और सुकून भरा माहौल उन्हें बार-बार यहाँ आने के लिए प्रेरित करता है। सोशल मीडिया पर भी इस इलाक़े की तस्वीरें और वीडियो बड़ी तादाद में साझा किए जा रहे हैं, जिससे केरन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

कभी एक शांत और दूरस्थ सीमा गाँव के रूप में पहचाना जाने वाला केरन आज जम्मू-कश्मीर के उभरते पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। रोज़ाना लगभग दो हज़ार पर्यटकों की आमद न सिर्फ़ इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता का सबूत है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की मेहनत, मेहमाननवाज़ी और बदलते आर्थिक हालात की भी गवाही देती है।

केरन की यह तरक़्क़ी दिखाती है कि शांति और स्थिरता का माहौल किसी भी क्षेत्र की तक़दीर बदल सकता है। पर्यटन से बढ़ते रोज़गार, मज़बूत होती स्थानीय अर्थव्यवस्था और नई उम्मीदों के साथ यह सीमा का गाँव आज विकास की एक नई मिसाल बनकर सामने आया है।

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