महबूबा मुफ़्ती ने इस मौक़े पर परिवार के बुज़ुर्गों और बच्चों से मुलाक़ात की, उन्हें शुभकामनाएँ दीं और इस धार्मिक रस्म की अहमियत पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि कश्मीर की असली पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, मोहब्बत, आपसी एहतराम और सदियों पुरानी साझा विरासत रही है। यही वह रवायत है जिसने इस वादी को हमेशा अलग मुक़ाम अता किया है।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित और मुसलमान सदियों से एक-दूसरे के सुख-दुख के शरीक रहे हैं। त्योहार हों, धार्मिक रस्में हों या सामाजिक मौक़े, दोनों बिरादरियों ने हमेशा एक-दूसरे का साथ निभाया है। ऐसे मौक़े उसी रूहानी और इंसानी रिश्ते को फिर से मज़बूत करने का ज़रिया बनते हैं।
ओमोह गाँव में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने भी इस मुलाक़ात का इस्तक़बाल किया। कई लोगों का कहना था कि इस तरह के क़दम समाज में भरोसे, मेल-मिलाप और भाईचारे की फ़ज़ा को मज़बूत करते हैं। उनका मानना है कि कश्मीर की असली ताक़त उसकी विविधता और आपसी मोहब्बत में है, जिसे हर हाल में बरक़रार रखा जाना चाहिए।
श्री आर.के. भट्ट के परिवार ने महबूबा मुफ़्ती का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उनके घर आकर शुभकामनाएँ देना एक ख़ास एहसास है। परिवार ने उम्मीद ज़ाहिर की कि कश्मीर में आपसी यकजहती और भाईचारे की यह रवायत आगे भी इसी तरह क़ायम रहेगी और समाज के तमाम तबक़े मिल-जुलकर अमन और तरक़्क़ी की राह पर आगे बढ़ेंगे।
सामाजिक जानकारों का भी मानना है कि ऐसे प्रतीकात्मक क़दम महज़ एक रस्मी मुलाक़ात तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में एक सकारात्मक पैग़ाम भी पहुँचाते हैं। जब अलग-अलग बिरादरियों के लोग एक-दूसरे की ख़ुशियों में शरीक होते हैं, तो इससे भरोसा मज़बूत होता है और साझा सांस्कृतिक विरासत को नई ताज़गी मिलती है।
कश्मीर की सरज़मीं हमेशा से सूफ़ी परंपरा, इंसानियत और भाईचारे की मिसाल रही है। यहाँ की तहज़ीब ने हर मज़हब और हर समुदाय को बराबर इज़्ज़त और मुक़ाम दिया है। वेरिनाग के ओमोह गाँव में हुई यह मुलाक़ात भी उसी पुरानी रवायत की एक ख़ूबसूरत झलक मानी जा रही है, जहाँ इंसानी रिश्ते और मोहब्बत मज़हबी फ़र्क़ से ऊपर नज़र आते हैं।
स्थानीय अवाम का कहना है कि ऐसे वाक़ियात कश्मीर की उस तस्वीर को मज़बूत करते हैं, जिसमें अमन, आपसी एतमाद और साझा विरासत सबसे बड़ी पहचान है। लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में भी इस तरह की पहलें जारी रहेंगी, ताकि वादी में भाईचारे, मेल-मिलाप और सामाजिक यकजहती का पैग़ाम और ज़्यादा मज़बूती के साथ आगे बढ़ता रहे।


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