पाक फौज की गाड़ी में घूमता दिखा लश्कर कमांडर रिज़वान हनीफ़, फौज-आतंकी गठजोड़ फिर बेनकाब


पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके से सामने आई एक ताज़ा वीडियो ने एक बार फिर पाक फौज और दहशतगर्द तंजीमों के बीच मौजूद गहरे ताल्लुक़ात को बेनकाब कर दिया है। वीडियो में लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर और डिप्टी कमांडर रिज़वान हनीफ़ को पाकिस्तान फौज की एक गाड़ी में सफ़र करते हुए साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। इस मंज़र ने उन दावों को और मज़बूत कर दिया है जिनमें बरसों से कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान की फौज और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई दहशतगर्द तंजीमों को सीधे तौर पर सहारा देती हैं।

वीडियो की सबसे अहम बात यह है कि जिस गाड़ी में रिज़वान हनीफ़ मौजूद है, उस पर पाकिस्तान फौज के निशानों के साथ-साथ लश्कर-ए-तैयबा और दूसरे दहशतगर्द गिरोहों से जुड़े स्टिकर भी साफ़ दिखाई दे रहे हैं। गाड़ी के अगले शीशे पर लगे इन स्टिकरों के क्लोज़-अप दृश्य इस बात की तरफ़ इशारा करते हैं कि यह कोई छिपा हुआ या गुप्त रिश्ता नहीं, बल्कि खुला और बेख़ौफ़ गठजोड़ है।

रिपोर्टों के मुताबिक़ रिज़वान हनीफ़ पीओके में लश्कर-ए-तैयबा के एक अहम ऑपरेशनल चेहरे के तौर पर जाना जाता है। हाल ही में उसका घर आग की एक घटना में जल गया था, जिसके बाद यह माना जा रहा था कि शायद उसकी गतिविधियों पर कुछ असर पड़ेगा। लेकिन सामने आई नई वीडियो से पता चलता है कि पाक फौज अब भी उसे पूरा सहयोग, सुरक्षा और रसद मुहैया करा रही है। इससे यह भी साफ़ होता है कि किसी भी तरह की मुश्किल या विवाद के बावजूद दहशतगर्द नेटवर्क को मिलने वाला संस्थागत समर्थन जारी है।

सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर किसी प्रतिबंधित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिन्हित दहशतगर्द संगठन का वरिष्ठ कमांडर सेना की गाड़ी का इस्तेमाल करता हुआ दिखाई दे, तो यह महज़ संयोग नहीं माना जा सकता। आम तौर पर सैन्य वाहनों का इस्तेमाल केवल अधिकृत सैन्य कर्मियों के लिए होता है। ऐसे में एक आतंकी कमांडर का सेना की गाड़ी में खुलेआम घूमना दोनों पक्षों के बीच करीबी तालमेल और विश्वास को दर्शाता है।

वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और सुरक्षा विश्लेषकों के बीच भी चर्चा तेज़ हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से दुनिया के सामने आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई का दावा करता रहा है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त अक्सर कुछ और ही तस्वीर पेश करती है। जब आतंकियों को सैन्य संसाधनों, सुरक्षा और संरक्षण तक पहुंच हासिल हो, तो ऐसे दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर आईएसआई की भूमिका को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आलोचकों का कहना है कि आईएसआई वर्षों से ऐसे तत्वों को रणनीतिक संपत्ति के तौर पर इस्तेमाल करती रही है। हालांकि पाकिस्तान लगातार इन आरोपों से इंकार करता रहा है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले वीडियो, तस्वीरें और विभिन्न घटनाएं इन दावों को चुनौती देती रही हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक़ यह घटना “आईएसआई – द अल्टीमेट फेल्योर” की उस धारणा को भी मज़बूत करती है, जिसके तहत कहा जाता है कि क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए गए आतंकी नेटवर्क अब पाकिस्तान की संस्थाओं की साख पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ़ वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद ऐसे दृश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।

टेरर नेक्सस अंडर स्पॉटलाइट” की थीम के तहत देखा जाए तो यह वीडियो सिर्फ़ एक व्यक्ति या एक वाहन की कहानी नहीं है। यह उस बड़े नेटवर्क की झलक पेश करती है जिसमें दहशतगर्द तंजीमें और राज्य के कुछ तत्व कथित तौर पर एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करते दिखाई देते हैं। गाड़ी पर लगे पाक फौज और लश्कर-ए-तैयबा के प्रतीक, रिज़वान हनीफ़ की मौजूदगी और उसे मिलता संरक्षण—ये तमाम पहलू मिलकर ऐसे सवाल खड़े करते हैं जिनका जवाब पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देना पड़ सकता है।

वीडियो के वायरल होने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान की हुकूमत और सैन्य नेतृत्व इस मामले पर क्या सफ़ाई पेश करते हैं। फिलहाल, सामने आए दृश्य फौज और दहशतगर्द नेटवर्क के बीच कथित रिश्तों को लेकर बहस को और तेज़ कर रहे हैं तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर चिंताओं को नई हवा दे रहे हैं।

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