कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल परिसर में आयोजित जागरूकता सभा से हुई, जहां शिक्षकों ने बच्चों को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का हक है कि वह स्कूल जाए, शिक्षा हासिल करे और एक सुरक्षित व खुशहाल बचपन का आनंद उठाए। किसी भी बच्चे से मजदूरी करवाना उसके अधिकारों का उल्लंघन है और समाज को मिलकर इस बुराई के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।
इस अवसर पर छात्रों ने प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किए, जिनमें उन्होंने बाल श्रम के दुष्प्रभावों और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे। छोटे-छोटे बच्चों ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि एक शिक्षित बच्चा ही अपने परिवार, समाज और देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि बच्चों को स्कूलों और खेल के मैदानों में होना चाहिए, न कि काम की कठिन परिस्थितियों में।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता रही। छात्रों ने रंग-बिरंगे और रचनात्मक पोस्टरों के माध्यम से बाल श्रम के खिलाफ सशक्त संदेश दिए। किसी पोस्टर पर लिखा था, "बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, औज़ार नहीं", तो किसी पर "शिक्षा है हर बच्चे का अधिकार" जैसे प्रेरणादायक संदेश अंकित थे। इन पोस्टरों ने उपस्थित सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
सबसे अधिक सराहना उस नाट्य प्रस्तुति की हुई, जिसमें छात्रों ने एक ऐसे बच्चे की कहानी पेश की जो गरीबी और मजबूरी के कारण मजदूरी करने पर विवश हो जाता है, लेकिन समाज और शिक्षकों के सहयोग से वह दोबारा स्कूल लौटता है और अपने सपनों को पूरा करने की राह पर आगे बढ़ता है। इस भावनात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और अभिभावकों ने छात्रों के प्रयासों की जमकर सराहना की। उनका कहना था कि इस प्रकार के आयोजन न केवल बच्चों में सामाजिक जागरूकता पैदा करते हैं बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति भी सजग बनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल श्रम के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनों से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा। शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। ऐसे में आर्मी गुडविल स्कूल हाजिनार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आया है।
यह आयोजन भारतीय सेना और स्थानीय शिक्षकों की उस मजबूत प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जिसके तहत कश्मीर घाटी के बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा को बढ़ावा देकर और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करके एक ऐसे समाज की नींव रखी जा रही है जो प्रगतिशील हो, जागरूक हो और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई से पूरी तरह मुक्त हो।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर एजीएस हाजिनार का यह कार्यक्रम एक बार फिर यह संदेश देता है कि बच्चों का स्थान स्कूलों में है, उनके हाथों में किताबें होनी चाहिए और उनका बचपन खुशियों, सपनों और शिक्षा से भरा होना चाहिए। यही एक उज्ज्वल, विकसित और खुशहाल कश्मीर की पहचान है।


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