मुज़ाहिरीन (प्रदर्शनकारियों) ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर पाकिस्तानी फ़ौज के खिलाफ़ नारेबाज़ी की तथा अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पीओजेके में रहने वाले लोग लंबे अरसे से बुनियादी हक़ूक़, आज़ादी-ए-बयान और इंसाफ़ की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को दबाने के लिए ताक़त का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि पीओजेके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा स्थानीय आबादी को डराने-धमकाने, जबरन ग़ायब करने और आवाज़ उठाने वालों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं में निर्दोष नागरिकों की मौत और कथित मानवाधिकार उल्लंघन बेहद चिंताजनक हैं और इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मुज़ाहिरीन का कहना था कि पीओजेके में आम लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े मसाइल, बेहतर सुविधाओं और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी जायज़ मांगों का जवाब दमन और सख़्ती से दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दुनिया को इस हक़ीक़त से वाक़िफ़ होना चाहिए कि पीओजेके के लोगों को अपनी बात कहने की पूरी आज़ादी हासिल नहीं है और वहां असहमति की आवाज़ों को दबाने का सिलसिला जारी है।
एहतिजाज के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कश्मीर के इस पार अमन, तरक़्क़ी और अवामी हिस्सेदारी को बढ़ावा देने की कोशिशें जारी हैं, जबकि दूसरी तरफ़ के लोगों को विभिन्न चुनौतियों और दबावों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह फ़र्क़ दोनों क्षेत्रों की ज़मीनी हक़ीक़त को साफ़ तौर पर बयान करता है।
प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मांग की कि पीओजेके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और वहां के लोगों के बुनियादी अधिकारों की हिफ़ाज़त सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय समय रहते इस मसले पर ध्यान नहीं देता, तो क्षेत्र में हालात और पेचीदा हो सकते हैं।
एहतिजाज में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि किसी भी समाज की तरक़्क़ी और ख़ुशहाली का रास्ता इंसाफ़, जवाबदेही और इंसानी हक़ूक़ के एहतराम से होकर गुज़रता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पीओजेके के लोगों की आवाज़ दुनिया तक पहुंचेगी और उनके साथ इंसाफ़ होगा।
श्रीनगर में हुआ यह पुरअमन प्रदर्शन पीओजेके के हालात को लेकर लोगों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अपील की कि वह क्षेत्र में कथित अत्याचारों और मानवाधिकार उल्लंघनों पर ख़ामोश रहने के बजाय सक्रिय भूमिका निभाए, ताकि प्रभावित लोगों को राहत और इंसाफ़ मिल सके।


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