ब्रैडफोर्ड में गूंजे पाक फौज के ख़िलाफ़ नारे, पीओजेके के अवाम ने उठाई ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़


यूनाइटेड किंगडम के शहर ब्रैडफोर्ड में शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर ज़ोरदार एहतिजाज (विरोध प्रदर्शन) किया। मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी तादाद में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने हाथों में छतरियां और बैनर थामे पाकिस्तान फौज और सुरक्षा बलों पर पीओजेके में आम नागरिकों के खिलाफ़ कथित ज़्यादतियों और दमनात्मक कार्रवाइयों का इल्ज़ाम लगाया।

मुज़ाहिरे के दौरान माहौल नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान फौज के खिलाफ़ सख्त एहतिजाज दर्ज कराते हुए पीओजेके में हालिया घटनाओं की निंदा की, जहां कथित तौर पर अपने बुनियादी हुक़ूक़ (अधिकारों) की मांग करने वाले शांतिपूर्ण लोगों के खिलाफ़ बल प्रयोग किया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि पीओजेके के अवाम लंबे अरसे से राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हक़ूक़ से महरूम हैं और उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।

मुज़ाहिरे में मौजूद लोगों ने बड़े-बड़े पोस्टर और तख्तियां उठा रखी थीं जिन पर इंसाफ़, आज़ादी और अवामी हक़ूक़ से जुड़े संदेश लिखे गए थे। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान फौज के रवैये के खिलाफ़ सख्त नाराज़गी का इज़हार करते नज़र आए। बारिश के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ और घंटों तक विरोध जारी रहा।

प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों में “ज़ुल्म बंद करो”, “पीओजेके को इंसाफ़ दो”, “अवाम की आवाज़ नहीं दबेगी” और “पाकिस्तानी दमन नामंज़ूर” जैसे नारे प्रमुख रहे। कई वक्ताओं ने अपने ख़िताब में कहा कि पीओजेके के लोगों को अपने भविष्य और बुनियादी अधिकारों के बारे में खुलकर बोलने का हक़ मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध की हर आवाज़ को ताक़त के ज़रिये दबाने की कोशिश की जा रही है।

मुज़ाहिरे की तस्वीरों और वीडियो में बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर एकत्र दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पीओजेके में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रम ने अवाम के अंदर गहरा ग़ुस्सा पैदा कर दिया है और अब यह नाराज़गी विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के बीच भी खुलकर सामने आ रही है।

सियासी विश्लेषकों का मानना है कि विदेशों में होने वाले ऐसे प्रदर्शन पीओजेके से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहे हैं। ब्रैडफोर्ड में हुआ यह प्रदर्शन भी इसी सिलसिले की एक अहम कड़ी माना जा रहा है, जहां प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने के आरोप लगाए।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पीओजेके के लोगों की आवाज़ को न तो धमकियों से दबाया जा सकता है और न ही बल प्रयोग से। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मुद्दे पर ध्यान दिया जाए।

मुज़ाहिरे का सबसे अहम पहलू यह रहा कि इसमें शामिल लोगों ने भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद अपना विरोध जारी रखा। उनका कहना था कि जब तक अवाम के साथ इंसाफ़ नहीं होगा और उनकी आवाज़ सुनी नहीं जाएगी, तब तक उनका लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

ब्रैडफोर्ड में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पीओजेके से जुड़े मुद्दों पर विदेशों में रहने वाले लोगों के बीच बेचैनी और नाराज़गी बढ़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपने हक़ूक़, इंसाफ़ और सम्मानजनक जीवन की मांग को हर मंच पर उठाते रहेंगे और किसी भी प्रकार के दमन के सामने झुकेंगे नहीं।

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