चिनार की छांव तले: उत्तर कश्मीर में भारतीय फ़ौज की “डैगर डेंटाथॉन” — अवाम के लिए एक नई उम्मीद


उत्तर कश्मीर की वादियों में जब भी बर्फ़ पिघलती है, तो उसके साथ लोगों की उम्मीदें भी नई रौशनी लेकर जाग उठती हैं। इन पहाड़ी इलाक़ों में ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं रही। दूर-दराज़ गांव, कम मेडिकल सहूलियतें, मुश्किल रास्ते और सख़्त मौसम—ये सब आम लोगों, ख़ासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए बड़ी चुनौती बनते रहे हैं। लेकिन ऐसे हालात में अगर कोई संस्था लगातार लोगों के साथ खड़ी नज़र आती है, तो वह है भारतीय सेना जिसे कश्मीर में कई लोग “ज़िंदगी की लाइफ़ लाइन” भी कहते हैं।

इसी इंसानी ख़िदमत और भरोसे की एक और मिसाल हाल ही में उत्तर कश्मीर में देखने को मिली, जब चिनार कॉर्प्स की तरफ़ से “डैगर डेंटाथॉन” नामी एक महीने लंबा डेंटल हेल्थकेयर आउटरीच प्रोग्राम चलाया गया। यह मुहिम का मक़सद सिर्फ़ इलाज देना नहीं, बल्कि लोगों में सेहत और सफ़ाई को लेकर जागरूकता पैदा करना भी था।

बारामुला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा और दूसरे दूरदराज़ इलाक़ों में आयोजित इस पहल ने उन लोगों तक दंत चिकित्सा की सुविधा पहुंचाई, जिनके लिए शहर तक जाना आसान नहीं होता। फ़ौज के डेंटल विशेषज्ञों और मेडिकल टीमों ने गांव-गांव जाकर लोगों का चेकअप किया, दवाइयाँ दीं और दांतों की बीमारियों से बचाव के तरीके समझाए। इस पूरे अभियान में 2500 से ज़्यादा लोगों ने फ़ायदा उठाया, जिनमें बड़ी तादाद बच्चों और बुज़ुर्गों की थी।

कश्मीर के देहाती इलाक़ों में अक्सर लोग दांतों की तकलीफ़ को मामूली समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। कई बच्चे दर्द में भी स्कूल जाते रहते हैं और बुज़ुर्ग चुपचाप तकलीफ़ सहते रहते हैं। ऐसे में भारतीय सेना का यह कदम न सिर्फ़ इलाज बल्कि इंसानी हमदर्दी की मिसाल बनकर सामने आया। डेंटल कैंपों में लोगों को बताया गया कि दांतों की सफ़ाई, सही खान-पान और नियमित जांच किस तरह बड़ी बीमारियों से बचा सकती है।

इस मुहिम की सबसे ख़ूबसूरत बात यह रही कि इसे सिर्फ़ मेडिकल कैंप तक सीमित नहीं रखा गया। स्कूलों, पंचायत घरों, कम्युनिटी सेंटर्स और सार्वजनिक जगहों पर जागरूकता सेशन भी आयोजित किए गए। बच्चों को ब्रश करने का सही तरीका सिखाया गया, साफ़-सफ़ाई की अहमियत समझाई गई और उन्हें बताया गया कि छोटी लापरवाही कैसे बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है।

एक स्कूल टीचर ने बड़ी भावुकता से कहा, “फ़ौज सिर्फ़ हमारी हिफ़ाज़त ही नहीं करती, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य की भी फ़िक्र करती है।” यही जज़्बा इस पूरी मुहिम में साफ़ दिखाई दिया। जहां एक तरफ़ जवान सीमाओं पर देश की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ वही फ़ौज गांवों में जाकर लोगों की सेहत का भी ख़याल रख रही है।

ऑपरेशन सद्भावना के तहत भारतीय सेना लंबे समय से कश्मीर में सामाजिक और मानवीय कार्यक्रम चलाती आ रही है। शिक्षा, खेल, महिला सशक्तिकरण, मेडिकल कैंप और रोज़गार से जुड़े कई प्रयास पहले भी लोगों के दिलों में जगह बना चुके हैं। लेकिन “डैगर डेंटाथॉन” जैसे अभियान यह साबित करते हैं कि सेना का रिश्ता सिर्फ़ सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि अवाम की भलाई और तरक़्क़ी से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

उत्तर कश्मीर के कई इलाक़ों में मेडिकल सुविधाओं की कमी आज भी एक हक़ीक़त है। बर्फ़बारी और दुर्गम रास्तों के कारण कई गांव महीनों तक कटे रहते हैं। ऐसे में सेना द्वारा चलाए गए मोबाइल मेडिकल और डेंटल कैंप लोगों के लिए किसी नेमत से कम नहीं। ख़ास तौर पर बुज़ुर्गों और बच्चों को इससे बहुत राहत मिली है।

इस पहल ने स्थानीय लोगों और सेना के बीच भरोसे को और मज़बूत किया है। जब एक जवान किसी बुज़ुर्ग का इलाज करता है या किसी बच्चे को मुस्कुराते हुए टूथब्रश इस्तेमाल करना सिखाता है, तब वहां सिर्फ़ एक मेडिकल कैंप नहीं चलता—बल्कि दिलों को जोड़ने का काम होता है।

कश्मीर की धरती ने मुश्किल दौर भी देखे हैं, लेकिन इन पहाड़ों के बीच मोहब्बत, इंसानियत और भरोसे की जो रौशनी जलती है, उसे ऐसे प्रयास और भी मज़बूत करते हैं। भारतीय सेना की “डैगर डेंटाथॉन” मुहिम इसी रौशनी की एक मिसाल है, जिसने यह साबित किया कि फ़ौज सिर्फ़ सरहदों की निगेहबान नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों और मुस्कुराहटों की भी रखवाली करती है।

आज उत्तर कश्मीर के कई गांवों में बच्चे खुलकर मुस्कुरा रहे हैं, बुज़ुर्ग राहत महसूस कर रहे हैं और लोगों के दिलों में यह एहसास और गहरा हुआ है कि भारतीय सेना वाक़ई “कश्मीर की लाइफ़ लाइन” है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ