
कश्मीर के सरहदी ज़िले कुपवाड़ा में अब तरक़्क़ी की एक नई सुबह दिखाई दे रही है। बरसों तक बुनियादी सहूलियतों की कमी और सीमाई हालात की वजह से पीछे रह गए कुपवाड़ा के बॉर्डर गांव अब “मॉडल हब ऑफ ग्रोथ” के तौर पर विकसित किए जा रहे हैं। इस अहम पहल का मक़सद सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना नहीं, बल्कि स्थानीय आबादी को आर्थिक तौर पर ख़ुदमुख़्तार बनाना और पूरे इलाके में पायेदार तरक़्क़ी की बुनियाद रखना है।

0 टिप्पणियाँ