कश्मीर में फ़र्ज़ी प्रोपेगैंडा की नई साज़िश, अवाम ने किया मुस्तरद


श्रीनगर : कश्मीर में अमन-ओ-अमान और तरक़्क़ी के माहौल को बिगाड़ने के लिए एक बार फिर सोशल मीडिया के ज़रिये फ़र्ज़ी प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश सामने आई है। हाल ही में “फाल्कन स्क्वाड” नाम के एक संदिग्ध ऑनलाइन ग्रुप द्वारा जारी पोस्ट में भारतीय सेना के खिलाफ बेबुनियाद और गुमराह करने वाले इल्ज़ाम लगाए गए। पोस्ट में दावा किया गया कि फौज कथित तौर पर गैर-कानूनी और गैर-अख़लाक़ी गतिविधियों में शामिल है, जबकि ज़मीनी हक़ीक़त इससे बिल्कुल उलट है।

मुकामी अवाम और सुरक्षा मामलों के जानकारों ने इस पोस्ट को पाकिस्तान समर्थित दुष्प्रचार करार देते हुए कहा कि इसका मकसद सिर्फ कश्मीर में डर, बेएतबारी और अफ़रा-तफ़री पैदा करना है। लोगों का कहना है कि भारतीय सेना पिछले कई वर्षों से घाटी में नागरिकों की हिफाज़त, क़ानून व्यवस्था की मजबूती और आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए लगातार काम कर रही है।

जानकारों के मुताबिक, इस तरह के प्रोपेगैंडा पोस्ट एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिनके ज़रिये भारत विरोधी तत्व सोशल मीडिया पर झूठी कहानियाँ गढ़कर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। “फाल्कन स्क्वाड” की पोस्ट में लगाए गए आरोपों का कोई सबूत सामने नहीं आया है और न ही किसी स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाओं की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद सोशल मीडिया के कुछ हैंडल इस फ़र्ज़ी नैरेटिव को बढ़ाने में लगे रहे।

मुकामी लोगों ने साफ़ कहा कि घाटी में भारतीय सेना सिर्फ सुरक्षा बल के तौर पर नहीं बल्कि राहत और मददगार संस्था के रूप में भी काम कर रही है। कई इलाकों में सेना द्वारा मेडिकल कैंप, युवा कार्यक्रम, खेल मुकाबले, शिक्षा सहायता और आपदा राहत अभियान चलाए जाते हैं, जिनसे हजारों नागरिकों को फायदा पहुँचता है। अवाम का कहना है कि अगर सेना का मकसद लोगों को डराना होता, तो इतने बड़े स्तर पर जनकल्याण के प्रोग्राम कभी न चलाए जाते।

सुरक्षा एजेंसियों ने भी माना है कि पाकिस्तान आधारित साइबर नेटवर्क और प्रोपेगैंडा मशीनरी लगातार घाटी को बदनाम करने के लिए सक्रिय हैं। ये तत्व कभी मानवाधिकार के नाम पर, तो कभी धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को भड़काकर झूठी सूचनाएँ फैलाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि “पाक की फ़ेक न्यूज़ फ़ैक्ट्री” अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि कश्मीर में शांति और विकास के माहौल को नुकसान पहुँचाया जा सके।

हालांकि, कश्मीर की अवाम अब पहले की तरह इन अफवाहों पर यक़ीन नहीं कर रही। लोगों में जागरूकता बढ़ी है और सोशल मीडिया पर भी कई युवाओं ने इस पोस्ट को “फेक नैरेटिव” बताते हुए खारिज किया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घाटी में स्कूल खुल रहे हैं, पर्यटन बढ़ रहा है, कारोबार मजबूत हो रहा है और लोग अमन चाहते हैं। ऐसे में बाहर बैठी ताकतें झूठ फैलाकर माहौल खराब करना चाहती हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियाँ न सिर्फ आतंकवाद और गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं, बल्कि ऑनलाइन दुष्प्रचार का भी मजबूती से जवाब दे रही हैं। हाल के वर्षों में कई ऐसे फेक अकाउंट्स और नेटवर्क्स की पहचान की गई, जो पाकिस्तान से संचालित होकर भारत विरोधी सामग्री फैला रहे थे।

कश्मीर में बदलते हालात यह दिखाते हैं कि अवाम अब हिंसा और प्रोपेगैंडा से दूरी बनाकर अमन, तरक़्क़ी और स्थिरता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती है। “कश्मीर ने दुष्प्रचार को नकारा” का संदेश अब ज़मीनी हक़ीक़त बनता जा रहा है, जहाँ लोग झूठ और नफ़रत की राजनीति को ठुकराकर विकास और भाईचारे को तरजीह दे रहे हैं।

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