पनज़थ स्प्रिंग पर उमड़ा जनसैलाब, सदियों पुरानी कश्मीरी रिवायत का जश्न


अनंतनाग के मशहूर पनज़थ स्प्रिंग में सालाना फिश फेस्टिवल बड़े जोश-ओ-खरोश के साथ मनाया गया, जहां कश्मीर के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों से आए सैकड़ों लोगों ने इस सदियों पुरानी रिवायत में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। वादी की खूबसूरत फिज़ाओं के दरमियान आयोजित यह त्योहार सिर्फ़ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि कश्मीर की तहज़ीब, आपसी यकजहती और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी की जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आया।

पनज़थ स्प्रिंग, जो अपने साफ़ और शफ़्फ़ाफ़ पानी के लिए पूरे इलाके में मशहूर है, इस मौके पर रंग-बिरंगी रौनकों से जगमगा उठा। बुज़ुर्ग, नौजवान और बच्चे पारंपरिक अंदाज़ में हाथों में बेंत से बनी टोकरीनुमा “ज़ाल” लेकर पानी में उतरे और पुराने कश्मीरी तौर-तरीकों के मुताबिक मछलियां पकड़ते नज़र आए। इस दौरान लोग चश्मे में उगी घास और जंगली पौधों की सफाई भी करते रहे ताकि पानी का बहाव बेहतर बना रहे और आसपास के गांवों तक साफ़ पानी की सप्लाई जारी रह सके।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह रिवायत कई सदियों पुरानी है और हर साल बड़े एहतराम के साथ निभाई जाती है। त्योहार का मक़सद सिर्फ़ मनोरंजन नहीं बल्कि चश्मे की सफाई, पानी के स्रोतों की हिफाज़त और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना भी है। पनज़थ का यह मीठा पानी दर्जनों गांवों के लिए सिंचाई और पीने के पानी का अहम ज़रिया माना जाता है।

फेस्टिवल के दौरान पारंपरिक कश्मीरी पहनावे, लोक संगीत और देसी खान-पान ने माहौल को और भी दिलकश बना दिया। लोगों ने इसे “अपनी मिट्टी और अपनी पहचान का जश्न” करार दिया। कई युवाओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई नस्ल को अपनी तहज़ीब और विरासत से जुड़ने का मौका मिलता है, जो आज के दौर में बेहद अहम है।

माहिरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस आयोजन को पर्यावरण संरक्षण की बेहतरीन मिसाल बताया। उनका कहना था कि आधुनिक दौर में जहां प्राकृतिक जल स्रोत लगातार खतरे में हैं, वहां पनज़थ का यह सामुदायिक मॉडल पूरे कश्मीर के लिए प्रेरणा बन सकता है। लोगों ने मिल-जुल कर जिस तरह चश्मे की सफाई की, उसने यह साबित किया कि जब समाज एकजुट हो तो पर्यावरण की हिफाज़त भी एक त्योहार का रूप ले सकती है।

“गाड़े मार” फेस्टिवल ने एक बार फिर यह पैगाम दिया कि कश्मीर सिर्फ़ अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अपनी गहरी सांस्कृतिक जड़ों, भाईचारे और प्रकृति से मोहब्बत के लिए भी जाना जाता है। यह आयोजन वादी की उस रूहानी और सामाजिक ताकत को उजागर करता है, जहां लोग अपनी विरासत को बचाने के लिए मिलकर काम करते हैं।

कश्मीर की यही यकजहती, तहज़ीबी रंगत और प्रकृति से रिश्ता उसकी असली पहचान है, जिसे पनज़थ का यह फिश फेस्टिवल हर साल नई रौनक और नई उम्मीद के साथ ज़िंदा रखता है।

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