पाकिस्तान एक बार फिर अपने ही बयानों में उलझता नज़र आ रहा है। Pakistan’s Ambassador to the United States ने यह कबूल किया है कि मुल्क में हालात बेहद संगीन हैं और औसतन हर रोज़ तीन दहशतगर्द हमले हो रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान को दुनिया में दहशतगर्दी का सबसे बड़ा शिकार करार दिया।
मगर इस बयान के बाद आलमी सतह पर एक नई बहस छिड़ गई है—क्या पाकिस्तान वाकई सिर्फ शिकार है, या फिर खुद दहशतगर्दी का मरकज़ भी रहा है? तजज़िया निगारों का कहना है कि बरसों से पाकिस्तान पर दहशतगर्द तंजीमों को पनाह देने और उन्हें इस्तेमाल करने के इल्ज़ाम लगते रहे हैं। ऐसे में मौजूदा हालात को उसकी अपनी पॉलिसियों का नतीजा भी माना जा रहा है।
माहिरीन का मानना है कि “अच्छे” और “बुरे” दहशतगर्द की सियासत ने पाकिस्तान को उसी दलदल में धकेल दिया है, जहां अब वो खुद निकलने की जद्दोजहद कर रहा है। सरहदी इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक, बढ़ती वारदातें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार खुद को मजलूम दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि उसकी ज़मीन लंबे अरसे तक दहशतगर्दी की पनाहगाह बनी रही है। अब जब वही आग उसके अपने घर तक पहुंच चुकी है, तो वह इसे आलमी हमदर्दी हासिल करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
इस बीच, आलमी बिरादरी पाकिस्तान से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रही है, ताकि दहशतगर्दी के इस बढ़ते खतरे पर काबू पाया जा सके। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या पाकिस्तान अपने दावों से आगे बढ़कर ज़मीनी सतह पर भी कोई असरदार कार्रवाई करता है या नहीं।

0 टिप्पणियाँ