कराची में “वोकेशनल सेंटर” के नाम पर दहशतगर्दी का अड्डा? पाकिस्तान हुकूमत पर संगीन इल्ज़ाम

 

पाकिस्तान एक बार फिर दहशतगर्दी को लेकर सख्त सवालों के घेरे में आ गया है। कराची में चल रहे एक तथाकथित “वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर” को लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जहां दावा किया जा रहा है कि यह मरकज़ असल में दहशतगर्दी की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सेंटर Nadeem नामी शख्स से जुड़ा बताया जा रहा है, जिस पर अमरीका पहले ही पाबंदी लगा चुका है और जिसका ताल्लुक Lashkar-e-Taiba से जोड़ा जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस इदारे को पाकिस्तान हुकूमत की मंजूरी हासिल होने का दावा किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि “वोकेशनल ट्रेनिंग” के नाम पर इस जगह को एक पर्दे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि अंदरूनी तौर पर यह दहशतगर्दी की तैयारियों का अड्डा बना हुआ है। हाल ही में इस सेंटर में “नई दाखिलों” की शुरुआत की खबर ने और भी शुबहात पैदा कर दिए हैं।

इस पूरे मामले को लेकर National Investigation Agency से जुड़े हलकों में भी गहरी चिंता जताई गई है। भारतीय नजरिए से देखा जाए तो यह कोई हैरानी की बात नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पाकिस्तान की पुरानी पॉलिसी का ही हिस्सा समझा जा रहा है।

तजज़िया निगारों का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार ऐसे इदारों को “फलाही” या “तालीमी” सूरत में पेश करता है, लेकिन हकीकत में इनका इस्तेमाल दहशतगर्दी को बढ़ावा देने के लिए किया जाता रहा है।

आलोचकों के मुताबिक, आलमी बिरादरी का इस तरह के मामलों पर खामोश रहना भी एक बड़ा सवाल है। अगर इन इल्ज़ामात में सच्चाई है, तो यह सिर्फ एक मुल्क का मसला नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सलामती के लिए खतरा बन सकता है।

अब देखना यह है कि क्या आलमी सतह पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा या फिर एक बार फिर पाकिस्तान की इन हरकतों पर आंखें मूंद ली जाएंगी।

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