बारामुला के आउडूरा इलाके से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहाँ भारतीय सेना की जानिब से तैयार किया गया नया पुल मक़ामी अवाम के लिए बड़ी सहूलियत बनकर उभरा है। इस पुल के इफ्तिताह के बाद इलाके के कई गांवों में रहने वाले करीब दो हज़ार लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में साफ़ तौर पर बदलाव महसूस किया जा रहा है, खासकर तलबा, किसानों और बुज़ुर्गों के लिए यह एक अहम सहारा साबित हो रहा है।
मक़ामी लोगों के मुताबिक़, पहले जो पुल मौजूद था, वो तक़रीबन आधा किलोमीटर दूर था, जिसकी वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों और खेतों की तरफ़ जाने वाले किसानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। कई दफा बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए नाले को पार करना पड़ता था, जिससे उनकी हिफाज़त को लेकर घरवालों में हर वक्त फिक्र बनी रहती थी। अब नए पुल के बन जाने से ना सिर्फ़ दूरी कम हो गई है, बल्कि बच्चों के लिए एक महफूज़ रास्ता भी मयस्सर हो गया है।
एक बुज़ुर्ग मक़ामी शख्स ने बताया कि पहले बच्चों को स्कूल पहुंचने में तक़रीबन एक किलोमीटर ज़्यादा चलना पड़ता था, या फिर उन्हें तेज़ बहाव वाले पानी से गुजरना पड़ता था। “अब ये पुल हमारे बच्चों के लिए राहत बन गया है, हमें अब उनकी सलामती की उतनी फिक्र नहीं रहती,” उन्होंने कहा। किसानों के लिए भी यह पुल किसी नेमत से कम नहीं है, क्योंकि अब उन्हें अपने बाग़ात और धान के खेतों तक पहुंचने के लिए लंबा और मुश्किल रास्ता तय नहीं करना पड़ता।
इस पुल की तामीर भारतीय सेना की 46 आरआर और डैगर डिविज़न की कोशिशों से मुमकिन हुई है, जिसे मक़ामी लोग सिर्फ़ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इंसानी हमदर्दी और तआवुन (cooperation) की मिसाल मान रहे हैं। एक और मक़ामी रहाइशी ने कहा, “हम भारतीय फौज के शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने हमारी ज़रूरत को समझा और इतना अहम कदम उठाया। पहले हमारे बच्चे पानी के बीच से गुजरते थे, जो बेहद खतरनाक था, लेकिन अब हमें सुकून मिला है।”
यह पुल चार से पांच गांवों के दरमियान बेहतर कनेक्टिविटी का ज़रिया बन चुका है, जिससे न सिर्फ़ तालीमी और ज़रई (agricultural) सरगर्मियां आसान हुई हैं, बल्कि लोगों के दरमियान आपसी राब्ता भी मज़बूत हुआ है। इस क़दम को मक़ामी अवाम और फौज के दरमियान बढ़ते भरोसे की एक अहम कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पुल के इफ्तिताह के बाद मक़ामी लोगों ने ज़ंदफ़रान रोड की मरम्मत की मांग भी उठाई है, यह कहते हुए कि इलाका एक अहम सैरगाह (tourist spot) है और बेहतर सड़क सुविधा से यहाँ की तरक्की को और रफ़्तार मिल सकती है।
आउडूरा में बना यह पुल सिर्फ़ एक रास्ता नहीं, बल्कि सहूलियत, हिफाज़त और तरक़्क़ी का प्रतीक बनकर उभरा है, जो यह दिखाता है कि जब तरक्की के कदम ज़मीनी हक़ीक़त को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं, तो उनका असर सीधे अवाम की ज़िंदगी पर पड़ता है।

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