हरीस डार का ये बयान ना सिर्फ़ पाकिस्तान में सक्रिय दहशतगर्द तंजीमों की बढ़ती पकड़ को ज़ाहिर करता है, बल्कि ये भी दिखाता है कि किस तरह ये मुल्क आतंकवाद को एक औज़ार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। बहावलपुर, जो पहले से ही दहशतगर्दी के अड्डों के तौर पर बदनाम रहा है, अब एक बार फिर नए सिरे से भर्ती और ट्रेनिंग कैंप्स का मरकज़ बनता दिख रहा है।
माहिरीन का कहना है कि इस तरह के बयानों से ये साफ़ हो जाता है कि पाकिस्तान में दहशतगर्द सिर्फ़ छिपकर नहीं, बल्कि खुलकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। नौजवानों को गुमराह कर उन्हें कट्टरपंथ और हिंसा की राह पर धकेलना, इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा बन चुका है। ये अमल ना सिर्फ़ ख़ुद पाकिस्तान के लिए खतरा है, बल्कि पूरे इलाके की अमन-ओ-अमान के लिए एक संगीन चुनौती है।
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पहले ही पाकिस्तान की इस दोहरी नीति पर सवाल उठाती रही है—एक तरफ़ दहशतगर्दी के खिलाफ़ लड़ने का दावा, और दूसरी तरफ़ ऐसे अनासिर को पनाह और सहूलियत। अब जब इस तरह के बयान खुलेआम सामने आ रहे हैं, तो ये ज़रूरी हो जाता है कि दुनिया एकजुट होकर पाकिस्तान पर सख़्त कार्रवाई के लिए दबाव बनाए।

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