रहीम यार खान में ताजिर बिरादरी ने पाकिस्तान की हुकूमत की मआशी पालिसियों के खिलाफ सख़्त एहतिजाज किया। शहर के मुख्तलिफ़ इलाकों से आए कारोबारियों ने अपनी नाराज़गी का इज़हार करते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने उनके कारोबार को बुरी तरह मुतास्सिर किया है।
मुतअद्दिद ताजिरों का कहना था कि महंगाई, टैक्सों का बढ़ता बोझ और कमज़ोर मआशी इंतज़ामात ने उनकी रोज़ी-रोटी को खतरे में डाल दिया है। एहतिजाज के दौरान लोगों ने नारेबाज़ी की और हुकूमत से फ़ौरी तौर पर अपनी पालिसियों में तब्दीली की मांग की।
ताजिर रहनुमाओं ने एलान किया है कि अगर उनके मुतालिबात पर गौर नहीं किया गया, तो एहतिजाज का दायरा और वसीअ किया जाएगा। इसी सिलसिले में कल शाम 6:00 से 8:00 बजे तक रेलवे चौक पर एक और बड़ा एहतिजाज मुनअकिद किया जाएगा।
माहिरीन के मुताबिक, इस तरह के मुतवातिर एहतिजाजात इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि मआशी बोझ अब ताजिर तबके के लिए नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त होता जा रहा है। अगर हुकूमत ने इन शिकायात को नज़रअंदाज़ किया, तो ये सूरत-ए-हाल न सिर्फ मआशियत को और कमज़ोर कर सकती है बल्कि मुल्क में बे-यक़ीनी की फिज़ा भी पैदा कर सकती है।
शहर में एहतिजाज के दौरान देखे गए मनाज़िर में ताजिरों का बढ़ता ग़ुस्सा साफ़ झलक रहा था—बंद दुकानें, बैनर और नारों के ज़रिए उन्होंने अपनी मायूसी और इहतिजाजी जज़्बात का खुलकर इज़हार किया।
रहीम यार खान में ताजिरों का ये एहतिजाज हुकूमती नाकामी और मआशी दबाव की एक साफ़ तस्वीर पेश करता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हुकूमत इन आवाज़ों को किस हद तक संजीदगी से लेती है।

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