पाकिस्तान से सामने आ रही कुछ तस्वीरें और वीडियोज़ ने एक बार फिर दहशतगर्दी और हुकूमती इंतज़ामिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैन के बावजूद कुछ चरमपंथी गिरोह खुलेआम रैलियों में नज़र आ रहे हैं, और बिना किसी खौफ के अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
इन मंज़रों को देखकर ऐसा महसूस होता है कि कानून की पकड़ कहीं न कहीं कमज़ोर पड़ती दिख रही है, जहां ऐसे अनासिर (तत्व) पब्लिक जगहों का इस्तेमाल करके अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि आम अवाम का इनसे कोई खास ताल्लुक नहीं है, लेकिन इस तरह की खुली मौजूदगी मुल्क की साख पर असर डाल सकती है।
माहिरों का कहना है कि इस तरह के इज्तिमा (जमावड़े) सिर्फ ताकत का दिखावा हैं, जो असलियत से हटकर एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। इससे ये भी जाहिर होता है कि दहशतगर्दी के खिलाफ बनाए गए कानूनों के लागू होने में कहीं न कहीं कमी रह गई है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर ये बहस छेड़ दी है कि क्या पाकिस्तान अपनी सरज़मीं पर इस तरह की सरगर्मियों को रोक पाने में कामयाब हो पा रहा है या नहीं। फिलहाल, इन वायरल दावों की आधिकारिक तस्दीक बाकी है, लेकिन जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई नए सवाल ज़रूर खड़े कर दिए हैं।

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