कश्मीर से जुड़ी एक अहम डेवलपमेंट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की अंदरूनी एडवाइजरी सामने आई है, जिसने संगठन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जारी हिदायतों में आतंकियों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें, आम लोगों से किसी भी तरह का ताल्लुक न रखें और ज्यादा से ज्यादा तन्हाई में रहें।
एडवाइजरी के मुताबिक, “दुनिया भर में तुम पर नजर रखी जा रही है,” जैसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल कर कैडर के अंदर खौफ पैदा करने की कोशिश की गई है। साथ ही, किसी भी किस्म की पर्सनल जानकारी—जैसे लोकेशन, मोबाइल नंबर या रोज़मर्रा की एक्टिविटी—शेयर करने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह महज़ एक हिदायत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइकोलॉजिकल कंट्रोल मैकेनिज़्म है। इस तरह के पैगामों के जरिए संगठन अपने सदस्यों को बाहरी दुनिया से काट देता है, जिससे उनमें शक, डर और पूरी तरह निर्भरता पैदा होती है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की रणनीति यह भी दिखाती है कि संगठन के अंदर भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। अपने ही लोगों पर शक और जानकारी लीक होने के डर से ऐसे सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह खुलासा एक बार फिर यह बताता है कि आतंकवाद का नेटवर्क सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि खौफ, तन्हाई और मानसिक दबाव के जरिए भी चलाया जाता है—जहां इंसान को धीरे-धीरे उसके अपने फैसलों और रिश्तों से दूर कर दिया जाता है।

0 टिप्पणियाँ