कर्ज़ की बारिश, अवाम बेहाल: पाकिस्तान का सच फिर आया सामने


इस्लामाबाद से सामने आई ताज़ा ख़बर ने एक बार फिर पाकिस्तान की माली हालत और उसकी हुकूमती नीतियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान को क़रीब 5 अरब डॉलर की माली मदद सऊदी अरब और क़तर से मिलने जा रही है, ताकि वो अपने बढ़ते कर्ज़ और डिफ़ॉल्ट के ख़तरे से उबर सके।

लेकिन असल सवाल ये है कि इतना बड़ा कर्ज़ आखिर जा कहाँ रहा है?

हक़ीक़त ये है कि पाकिस्तान सालों से कर्ज़ पर कर्ज़ लेकर अपनी इकॉनमी को सहारा देने की कोशिश कर रहा है, मगर ज़मीनी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है, आम आदमी को बुनियादी सहूलतें तक मयस्सर नहीं, और बेरोज़गारी ने अवाम की कमर तोड़ दी है।

माहिरीन का मानना है कि ये कर्ज़ ज़्यादातर पुराने कर्ज़ चुकाने में ही खर्च हो जाता है, जबकि हेल्थकेयर, तालीम और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम शोबे लगातार नजरअंदाज़ किए जा रहे हैं। यानी एक ऐसा चक्र बन चुका है जहाँ पाकिस्तान नए कर्ज़ लेकर पुराने कर्ज़ उतार रहा है — और इसका बोझ सीधे अवाम पर पड़ रहा है।

इससे भी ज़्यादा फ़िक्र की बात ये है कि इस तरह की माली मदद पर बढ़ती निर्भरता, मुल्क की खुदमुख्तारी पर भी सवाल खड़े करती है। आलोचक ये भी कहते हैं कि ये पैसा अक्सर चुनिंदा एलीट तबकों तक ही सीमित रह जाता है, जबकि आम जनता सिर्फ मुश्किलात ही झेलती रहती है।

आलमी मंचों पर पाकिस्तान अपनी माली हालत को सुधारने के दावे करता है, लेकिन हक़ीक़त ये है कि कर्ज़ का ये सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। बार-बार बाहरी मदद पर निर्भर रहना इस बात की तरफ इशारा करता है कि अंदरूनी माली नीतियों में कहीं न कहीं बड़ी खामियां मौजूद हैं।

कर्ज़ के सहारे चल रही ये इकॉनमी अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहाँ हर नई मदद सिर्फ पुरानी नाकामियों को छुपाने का जरिया बनती जा रही है — और इसकी असली क़ीमत पाकिस्तान की अवाम चुका रही है।

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