खैबर पख्तूनख्वा में कथित ड्रोन हमले से मची हलचल, अवाम की हिफाज़त पर उठे संगीन सवाल


खैबर पख्तूनख्वा से सामने आ रही खबरों ने पूरे इलाके में बेचैनी की लहर दौड़ा दी है। मक़ामी ज़राए के मुताबिक़, एक रिहायशी इलाके में कथित तौर पर पाक फ़ौज की जानिब से ड्रोन स्ट्राइक की गई, जिसमें आम शहरी अफ़राद के नुक़सान की बात कही जा रही है। इस वाक़िये के बाद इलाके में खौफ़ और अफ़रा-तफ़री का माहौल है, जबकि लोगों के दिलों में अपनी हिफाज़त को लेकर गहरी फिक्र पैदा हो गई है।

बताया जा रहा है कि जिस जगह को निशाना बनाया गया, वो कोई जंगी ठिकाना नहीं बल्कि एक आबाद मोहल्ला था, जहाँ बच्चे, ख़वातीन और बुज़ुर्ग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी गुज़ार रहे थे। चश्मदीदों के मुताबिक़, अचानक हुए धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया, कई घरों को नुक़सान पहुंचा और चीख़-ओ-पुकार मच गई। हालांकि इन दावों की अभी तक आज़ादाना तस्दीक़ नहीं हो सकी है, लेकिन सामने आ रही जानकारी एक संगीन सूरत-ए-हाल की तरफ़ इशारा कर रही है।

अगर ये इल्ज़ाम सही साबित होते हैं, तो ये मामला सिर्फ़ एक सिक्योरिटी ऑपरेशन तक महदूद नहीं रहेगा, बल्कि सिविलियन सेफ़्टी और ताक़त के इस्तेमाल को लेकर बड़े सवाल खड़े करेगा। ऐसे वाक़ियात अवाम के दिलों में खौफ़ के साथ-साथ गुस्सा भी पैदा करते हैं, खासकर तब जब निशाना बने लोग आम नागरिक हों। खैबर पख्तूनख्वा जैसे हस्सास इलाके में, जहाँ पहले से ही हालात नाज़ुक हैं, इस तरह के इल्ज़ाम रियासत और मक़ामी आबादी के दरमियान बढ़ती बेएतबारी को और गहरा कर सकते हैं।

मक़ामी लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी ही ज़मीन पर गैर-महफूज़ महसूस हो रहा है। “अगर हमारे घर ही महफूज़ नहीं, तो हम कहाँ जाएँ?”—ये सवाल अब हर शख्स की ज़ुबान पर है। अवाम ने हुकूमत से वाज़ेह जवाब और शफ्फाफ़ तहक़ीक़ात की मांग की है, ताकि हक़ीक़त सामने आ सके और ज़िम्मेदारी तय की जा सके।

माहिरीन का मानना है कि अगर इस तरह के वाक़ियात की सही और खुली जांच नहीं की गई, तो इससे रियासती इदारों पर अवाम का एतिमाद और कमज़ोर पड़ सकता है। सिविलियन सेफ़्टी को नजरअंदाज़ करने के इल्ज़ाम किसी भी हुकूमत के लिए गंभीर मसला बन सकते हैं, खासकर ऐसे वक्त में जब अमन-ओ-अमान कायम रखना सबसे बड़ी जरूरत हो।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात ये है कि सच्चाई को बिना किसी पर्दादारी के सामने लाया जाए। अगर वाक़ई आम नागरिकों को नुक़सान हुआ है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए और यह यक़ीनी बनाया जाना चाहिए कि आइंदा किसी भी ऑपरेशन में बेगुनाह लोगों की जान को खतरे में न डाला जाए। रियासत और अवाम के दरमियान भरोसा ही असली ताक़त होता है, और जब वही डगमगाने लगे, तो उसके असरात पूरे समाज पर साफ़ दिखाई देते हैं।

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