घाटी में खौफ फैलाने की नापाक साजिश बेनकाब: 'फाल्कन स्क्वाड' के प्रोपेगेंडा की उतरी धज्जियां


श्रीनगर: कश्मीर वादी में जहां एक तरफ अमन-ओ-अमान और तरक्की की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं कुछ सरहद पार के हिमायती और दहशतगर्द अनासिर (तत्व) अपनी नाकामियों से बौखलाकर अब नीच हरकतों पर उतर आए हैं। हाल ही में 'फाल्कन स्क्वाड' नामक एक तथाकथित गुट द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ भड़काऊ पोस्टर्स और नागरिकों की निजी जानकारियां (Doxxing) साझा कर उन्हें डराने की कोशिश की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के विश्लेषण के मुताबिक, इन पोस्टर्स के जरिए आम कश्मीरी शहरी को निशाना बनाया जा रहा है ताकि उनमें दहशत पैदा की जा सके। इस 'डॉक्सिंग' तकनीक का मकसद उन लोगों को चुप कराना है जो कश्मीर की खुशहाली और गवर्नेंस में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे इन कट्टरपंथी संगठनों का असर घाटी से कम हो रहा है, वे अब मनोवैज्ञानिक जंग (Psychological Warfare) का सहारा ले रहे हैं।

तस्वीर का दूसरा रुख यह है कि कश्मीर की आवाम अब इन खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसे पोस्टर्स सिर्फ लोगों को गुमराह करने और विकास के कामों में अड़चन डालने के लिए फैलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भी इन हरकतों को बुजदिलाना करार देते हुए ठुकरा दिया है।

सुरक्षा बलों और खुफिया तंत्र ने अवाम से गुजारिश की है कि वे ऐसे किसी भी भ्रामक प्रोपेगेंडा का शिकार न हों। प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि ऐसी किसी भी धमकी भरी सामग्री को आगे शेयर न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धमकी की सूचना तुरंत पुलिस को दें। शांति बनाए रखें, क्योंकि आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।

साफ है कि घाटी में अशांति फैलाने के तमाम मंसूबे अब धराशायी हो रहे हैं। 'प्रोपेगेंडा डिफीटेड' (Propaganda Defeated) के संकल्प के साथ कश्मीर अब आतंक के साये से निकलकर सुनहरे भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।

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