भारतीय सेना की इस विशेष पहल के तहत इन छात्राओं को बुनियादी कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल स्किल्स से लैस किया गया है। बुनियादी ढांचे और तकनीकी उपकरणों की मदद से सेना ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसने इन लड़कियों के लिए अवसरों के बंद दरवाजे खोल दिए हैं। इस सेंटर में ट्रेनिंग पूरी करने वाली छात्राओं के चेहरे पर एक नया आत्मविश्वास झलक रहा है।
जानकारों का मानना है कि इस तरह की पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देती है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण (Women Empowerment) में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। जहां कभी कनेक्टिविटी एक सपना थी, वहां की लड़कियां अब डिजिटल वर्ल्ड में कदम रख रही हैं। यह कदम कुपवाड़ा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में 'स्मार्ट विलेज' के सपने को हकीकत में बदलने की ओर एक बड़ा इशारा है।
स्थानीय लोगों ने सेना की इस कोशिश की जमकर तारीफ की है। लोगों का कहना है कि शिक्षा के प्रति सेना का यह समर्पण घाटी में एक सकारात्मक बदलाव ला रहा है। ट्रेनिंग कैंप के समापन पर छात्राओं को सर्टिफिकेट दिए गए, जो न केवल उनकी मेहनत का प्रमाण हैं, बल्कि उनके सुनहरे भविष्य की गारंटी भी।
कुपवाड़ा की इन 30 बेटियों ने साबित कर दिया है कि अगर सही संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी मैदान में पीछे नहीं हैं। 'डिजिटल इंडिया' की यह गूंज अब कश्मीर के पहाड़ों से टकराकर पूरी दुनिया को एक नया और प्रगतिशील संदेश दे रही है।

0 टिप्पणियाँ