मकामी लोगों का दावा है कि फौज ने सिर्फ इबादतगाह तक ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के घरों में भी जबरन दाखिल होकर औरतों और बच्चों के साथ बदसलूकी की। हालात उस वक़्त और संगीन हो गए जब एक आठ साल के मासूम बच्चे को उसकी दादी की गोद में ही गोली मार दी गई। इस दिल दहला देने वाले वाकये ने पूरे इलाके को ग़म और ग़ुस्से में डाल दिया है।
तजज़िया-कारों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई न सिर्फ इंसानी हुकूक की खुली खिलाफ़वर्ज़ी है, बल्कि ये फौज की सिविल इलाकों में बढ़ती सख्ती और बेकाबू रवैये को भी उजागर करती है। बजौर में इन घटनाओं के बाद लोगों में नाराज़गी तेज़ी से बढ़ रही है।
मकामी आबादी अब खुलकर इन कार्रवाइयों के खिलाफ आवाज़ उठा रही है। कई जगहों पर विरोध और ग़ुस्से का माहौल देखा जा रहा है, जो इस बात का इशारा है कि हालात दिन-ब-दिन और ज्यादा पेचीदा होते जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के वाकये फौज और आम लोगों के दरमियान दूरी को और बढ़ा रहे हैं, जिससे इलाके में तनाव और अस्थिरता में इज़ाफा हो सकता है।
बहरहाल, बजौर का ये मामला अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़े संकट की शक्ल लेता जा रहा है, जहां फौजी कार्रवाई और अवाम के ग़ुस्से के बीच टकराव साफ नज़र आ रहा है।

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