कश्मीर की बेटी ने रचा इतिहास: रुबा मजीद बनीं DGCA ड्रोन इंस्ट्रक्टर परीक्षा पास करने वाली पहली महिला

श्रीनगर, (विशेष रिपोर्ट): कश्मीर की युवा इंजीनियर रुबा मजीद ने एक नई मिसाल कायम करते हुए इतिहास रच दिया है। वह क्षेत्र की पहली महिला बन गई हैं जिन्होंने Directorate General of Civil Aviation (DGCA) की ड्रोन इंस्ट्रक्टर परीक्षा सफलतापूर्वक पास की है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत का परिणाम है, बल्कि कश्मीर में तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी प्रतीक है।

रुबा, जो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं, ने ड्रोन टेक्नोलॉजी से अपना पहला परिचय National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) में इंटर्नशिप के दौरान हासिल किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक सामान्य सीखने का अनुभव था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी रुचि गहराती चली गई। उन्होंने ड्रोन के नियम, सुरक्षा मानकों और इसके व्यावहारिक उपयोगों को समझना शुरू किया।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ड्रोन के सुरक्षित उपयोग को लेकर जागरूकता की कमी है, जिसके कारण कई बार जोखिम की स्थिति पैदा हो जाती है। यही बात उन्हें इस क्षेत्र में गंभीरता से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। “मैं अपने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड का इस्तेमाल असली समस्याओं को हल करने में करना चाहती थी,” उन्होंने कहा।

रुबा की उपलब्धि यहीं तक सीमित नहीं है। उनका एक अभिनव प्रोजेक्ट — लो-कॉस्ट ड्रोन इमेजिंग फॉर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर फॉल्ट डिटेक्शन — MSME Hackathon 5.0 में चयनित हुआ है, जिसके लिए उन्हें 15 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। यह प्रोजेक्ट बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम में होने वाली समस्याओं जैसे ओवरहीटिंग, इंसुलेशन डैमेज और कोरोना डिस्चार्ज का समय रहते पता लगाने में मदद करेगा, जो खासतौर पर पहाड़ी और दूरदराज़ इलाकों में बड़ी चुनौती होते हैं।

उनका कहना है कि इस तकनीक के जरिए ड्रोन में लगे सेंसर इन खामियों को पहले ही पहचान सकते हैं, जिससे बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट डेवलपमेंट स्टेज में है और ग्रांट की मदद से इसका प्रोटोटाइप तैयार किया जाएगा।

रुबा का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में पर्यावरण निगरानी और कृषि क्षेत्र में भी उपयोगी साबित हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, डल झील में प्रदूषण का पता लगाने या फसलों की स्थिति का आकलन करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सफर आसान नहीं था। “काफी ट्रायल और एरर हुआ, खासकर सेंसर और डेटा के साथ काम करना चुनौतीपूर्ण था,” उन्होंने कहा।

रुबा मजीद की यह सफलता कश्मीर में उभरती नई तकनीकी सोच और युवाओं की बदलती दिशा को दर्शाती है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणा का एक मजबूत स्रोत भी है, जो अब तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला जुटा रही हैं।

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