यह घोषणा क्षेत्र में आतंकवाद तथा उसके पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने के लिए मोदी सरकार के दृढ़ रुख को रेखांकित करती है।
पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में शाह ने सरकार की अडिग रणनीति के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर में हमने फैसला किया है कि अगर कोई आतंकवादी संगठन में शामिल होता है तो उसके परिवार के सदस्यों को कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।’’
शाह ने यह नीति पत्थरबाजों पर भी लागू करते हुए कहा कि उनके परिवारों को भी सरकारी नौकरी से वंचित रखा जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चुनौती के बावजूद, सरकार का रुख कायम रहा।
हालांकि, शाह ने एक अपवाद का उल्लेख किया : यदि परिवार का कोई सदस्य अपने किसी रिश्तेदार के आतंकवादी संगठन में शामिल होने के बारे में अधिकारियों को सूचित करता है, तो उस परिवार को राहत प्रदान की जा सकती है। शाह ने आतंकवादियों के अंतिम संरस्करण में हुए बदलावों पर प्रकाश डाला। पहले, बड़े जुलूस एक सामान्य घटना थी, लेकिन अब, सार्वजनिक समारोहों को रोकने के लिए आतंकवादियों को अलग-अलग स्थानों पर पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दफनाया जाता है।
शाह ने कहा, "जब कोई आतंकवादी सुरक्षा बलों द्वारा घेर लिया जाता है, तो उसे सबसे पहले आत्मसमर्पण करने का मौका दिया जाता है। हम उसके परिवार के सदस्यों जैसे उसकी माँ या पत्नी को उसके आत्मसमर्पण की अपील करने के लिए लाते हैं। अगर वह इनकार करता है, तो उसे परिणाम भुगतने पड़ते हैं।"
गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवादियों को निशाना बनाने तथा आतंकवादी तंत्र को नष्ट करने के सरकार के दोहरे दृष्टिकोण के कारण आतंकवादी घटनाओं में पर्याप्त कमी आई है।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है और इस पर काफी हद तक अंकुश लगाया है।’’
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के संबंध में शाह ने पुष्टि की कि सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत इसके प्रकाशनों और प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया है।
केरल में स्थापित समूह पीएफआई को उसके कथित आतंकी संबंधों के कारण सितंबर 2022 में प्रतिबंधित कर दिया गया था।
खालिस्तानी समर्थक अलगाववादी अमृतपाल सिंह के मामले का जिक्र करते हुए शाह ने खुलासा किया, "हमने उन्हें एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत जेल में बंद कर दिया है।"
'वारिस पंजाब दे' के नेता सिंह को अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।
जेल में बंद होने के बावजूद, सिंह ने पंजाब के खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़े इन कड़े उपायों के प्रभाव पर प्रकाश डालते हैं।
जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं 2018 में 228 से घटकर 2023 में लगभग 50 हो गयी।
सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ें 2018 में 189 से घटकर 2023 में लगभग 40 हो जाएंगी।
आतंकवादी घटनाओं के कारण नागरिक हताहतों की संख्या 2018 में 55 से घटकर 2023 में लगभग 5 हो गयी, तथा सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु दर 2018 में 91 से घटकर 2023 में लगभग 15 हो गयी ।
सरकार की सख्त कार्रवाई से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद तथा उसकी सहायता प्रणालियों में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो क्षेत्र में स्थायी शांति तथा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

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