रज्जाक का परिवार दूसरी बार टारगेट किलिंग का शिकार बना

पीड़िता के पिता की 2004 में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी, तथा बीती शाम को रज्जाक को बेरहमी से मार दिया गया 


राजौरी,24 अप्रैल : सोमवार शाम को आतंकवादियों द्वारा मारे गए सरकारी कर्मचारी मुहम्मद रज्जाक के परिवार को दूसरी बार आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाया गया।

बीस साल पहले परिवार के मुखिया मुहम्मद अकबर की भी आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। सोमवार शाम को उनके बेटे मुहम्मद रजाक की भी आतंकवादियों ने हत्या कर दी, जिससे न केवल गांव में बल्कि पूरे थानामंडी उपमंडल में सदमे, भय और निराशा की लहर फैल गई।

अकबर के भाई, मुहम्मद हुसैन (72), ने अपने भाई को याद करते हुए कहा "मेरे बड़े भाई मुहम्मद अकबर 2004 में गांव के नायब सरपंच थे, तब उन्हें आतंकवादियों ने अगवा कर लिया तथा बेरहमी से मार डाला"।

उन्होंने कहा, "मेरे भाई का शव उसके अपहरण के कुछ दिनों बाद मिला था, उसके सव को आतंकवादियों ने क्षत-विक्षत कर दिया गया था। अब मेरा भतीजा, मेरे दिवंगत भाई का बेटा, आतंकवाद का शिकार बन गया है।"

उन्होंने कहा, "हमारे परिवार को दोहरा झटका लगा है और इस दूसरे झटके से हम टूट गए हैं।"

उन्होंने कहा, "आतंकवादियों द्वारा गोली मारकर मारे गए रजाक अपने पीछे दो बेटे और तीन बेटियाँ छोड़ गए हैं। वह एक नेक इंसान थे और स्वभाव से धार्मिक थे। वह पाँच वक्त की नमाज़ के अलावा रमज़ान के रोज़े भी रखते थे।"

गांव के बुजुर्ग मुहम्मद इकबाल, जो एक धार्मिक उपदेशक भी हैं, ने कहा कि इस घटना ने उन्हें 13 मार्च 2004 के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन की याद दिला दी, जब रज्जाक के पिता मुहम्मद अकबर की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

उन्होंने उन भयावह क्षणों को याद करते हुए कहा, "अकबर का अपहरण कर लिया गया और फिर उसके शव को गेहूं के खेतों में दफना दिया गया। शव बरामद होने से पहले उस पर गेहूं के पौधे भी उग आए थे।"

निमाज-ए-जनाजा के दौरान स्थिति पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों ने क्षेत्र में सेना चौकी कोपरा को बहाल करने की मांग की, जो 2010 तक वहां कार्यरत थी, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया था।


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