बदलते कश्मीर की बदलती तस्वीर


श्रीनगर 29 नवम्बर : पहाड़ों की गोद में बैठी जन्नत, सारे जुल्मों को सहती थी |

यहां तो मानव दानव बन गया, एक दिन वो खुद से कहती थी ||


अपने आप में रोते थी ये, इन मुश्किल सवालों में |

आखिरी क्यों पत्थर मार रहे हो, मेरे ही रखवालों पे ||


क्या मैं इतनी बुरी हूं, जो इतने जुर्मों को सहती हूं |

मुझे इंसाफ मिलेगा कब , भारत मां तुझसे कहती हूं ||


हट गई धारा 370, कश्मीर में अब खुशहाली है |

जिस धरती में चल रही थी गोली, अब वहां हरियाली है ||


स्वर्ग से बढ़कर है ये धरती, जन्नत का कोहिनूर है |

सेब अखरोट बादाम के बागीचे, केसर में मशहूर है ||


नाकाम हो रहे दुश्मन के इरादे, दुश्मन सोचता रह गया |

अच्छा क्या है बुरा है क्या, बच्चा-बच्चा समझ गया || 


ना अब कोई पत्थर मारेगा, न चलेंगी यहां गोली |

अब मनायेगा कश्मीर खुशी से, ईद दिवाली होली || 


आने वाला कल कहता है, कश्मीर फिर से स्वर्ग बन जाएगा |

दुनिया वाले देखते रहना, अब हर घर तिरंगा लहरायेगा || 


मां के ममता छा गई है, बच्चों की मुस्कान आ गई है |

चारो और अमन की खुशहाली है, यारो ये बदलता कश्मीर है || 

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