कश्मीरी पत्रकार का कहना है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने में मजबूत है

विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, राजनयिकों तथा  कार्यकर्ताओं से मुलाकात की तथा उन्हें जम्मू कश्मीर की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया 

जिनेवा, 9 अक्टूबर : वरिष्ठ कश्मीरी पत्रकार तथा लेखक खालिद जहांगीर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 54वें सत्र में अपने हस्तक्षेप के दौरान दोहराया कि पाकिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करना जारी रखता है। जहांगीर, जो इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज (आईसीपीएस) के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा, "पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने लंबे समय से जम्मू कश्मीर को प्रभावित किया है। जम्मू कश्मीर की सीमा के भीतर सीमा पार आतंकवाद में पाकिस्तान की भागीदारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती है। वर्ष 2022 के लिए नई दिल्ली की वार्षिक रिपोर्ट की सामग्री। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने में मजबूत है, जिसके परिणामस्वरूप व्यापार गतिशीलता तथा आपसी सम्बन्धों में गड़बड़ी हो रही है। रिपोर्ट आगे इस बात पर जोर देती है सीमा पार आतंकवाद, घुसपैठ तथा  कश्मीर की क्षेत्रीय सीमाओं के पार तस्करी के अवैध परिवहन की निरंतर घटनाएं।

मैं पीड़ितों के प्रतिनिधि के रूप में खड़ा हूं, जो जम्मू कश्मीर के क्षेत्र में पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद के उथल-पुथल के जाल में फंसी दबी हुई आवाजों का प्रतीक है। मेरी भूमिका मुझे मानवाधिकारों के परिवेश पर लगाये गये प्रभाव की गहराई को रेखांकित करने के लिए बाध्य करती है। समय के साथ, जम्मू कश्मीर की मूल आबादी ने शांति की स्थिति तथा  स्व-संप्रभुता की आकांक्षा की है, आकांक्षाये  जो पाकिस्तान के हिंसा वाले माहौल को भड़काने के अड़ियल पूर्वाग्रह से लगातार प्रभावित हो रही हैं। इस पूर्वाग्रह के सहवर्ती परिणाम जीवन की अपूरणीय क्षति, पारिवारिक इकाइयों के विघटन तथा स्थानीय आबादी के भीतर व्यापक भय के रूप में प्रकट होते हैं। जहांगीर ने आगे कहा कि इन सीमा पार आतंकवादियों द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली स्वतंत्र भाषण तथा अनियंत्रित अभिव्यक्ति के मौलिक सिद्धांतों को नष्ट कर देती है, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मानवाधिकार परिदृश्य से संबंधित यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) का व्यापक निष्पादन एक मौलिक अनिवार्यता है। .

इन सीमा पार आतंकवादियों द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली न केवल एक निंदनीय चरित्र का उदाहरण देती है, बल्कि जम्मू कश्मीर  के निवासियों के निहित मानवाधिकारों की पवित्रता का भी उल्लंघन करती है। विस्फोटक आयुध तैनाती तथा  आग्नेयास्त्र संलग्नता जैसे अपराध अमिट नुकसान पैदा करते हैं, जो इस ताने-बाने को नष्ट कर देते हैं। सुरक्षा तथा समग्र कल्याण। शारीरिक हिंसा के दायरे से परे, ये सामरिक युद्धाभ्यास स्वतंत्र भाषण तथा अनियंत्रित अभिव्यक्ति के मूल सिद्धांतों को नष्ट कर देते हैं। पत्रकार, कार्यकर्ता तथा  आम नागरिक जो असहमतिपूर्ण कथनों को व्यक्त करने का साहस करते हैं, उन्हें डराने-धमकाने की रणनीति का सामना करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके विवेकशील विशेषाधिकारों की काट-छाँट में पाकिस्तान के मानवाधिकार परिदृश्य से संबंधित यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) का व्यापक कार्यान्वयन एक मौलिक अनिवार्यता है। आइये हम सामूहिक रूप से पीड़ितों की आवाज़ को प्रतिध्वनित करें तथा मुखरता से न्याय की मांग करें। प्रयास को निर्देशित किया जाना चाहिये  जम्मू-कश्मीर में एक ऐसा माहौल तैयार करने की दिशा में, जिसमें उसकी संतानें आतंक के साये से मुक्त होकर आगे बढ़ सकें, तथा  जिसमें मानवाधिकारों को महज बातों तक सीमित न रखा जाये  बल्कि एक स्पष्ट सच्चाई का गठन किया जाये । अंतरराष्ट्रीय बिरादरी सर्वसम्मति से पाकिस्तान की सीमा के भीतर सीमा पार आतंकवाद के प्रति झुकाव की निंदा करे। जम्मू कश्मीर  तथा  अटूट दृढ़ता के साथ इस दुविधा का सामना करें।

परिषद से इतर जहांगीर ने विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, राजनयिकों तथा कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की तथा उन्हें जम्मू कश्मीर की वर्तमान स्थिति तथा  क्षेत्र में अनिश्चितता तथा अराजकता पैदा करने के पाकिस्तान के प्रयासों से अवगत कराया।

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