उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना की प्रकृति को देखते हुए यह आवश्यक है कि सभी हितधारक इसकी सफलता के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाये उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश की आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया पहल का अग्रदूत रहा है। उन्होंने कहा, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का ध्वजवाहक है।
समीक्षा के दौरान, यह सामने आया कि एलसीए एमके 1 के सभी अनुबंधित लड़ाकू संस्करण भारतीय वायुसेना को सौंप दिए गये थे रक्षा मंत्रालय ने कहा कि एचएएल के प्रतिनिधियों ने सीएएस को आने वाले महीनों में अनुबंधित ट्विन-सीटरों की समय पर डिलीवरी का आश्वासन दिया। एलसीए एमके 1 के अलावा, 83 एलसीए एमके-1ए विमानों को भी 2021 में भारतीय वायुसेना द्वारा अनुबंधित किया गया है। एचएएल की सराहना करते हुए, सीएएस ने संकेत दिया कि इन आश्वासनों के आधार पर, एलसीए एमके 1ए को अगले साल की शुरुआत में भारतीय वायुसेना के परिचालन अड्डों में से एक में नए बनाए गए स्क्वाड्रन में शामिल किया जा सकता है। एचएएल के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक ने उपस्थित लोगों को आश्वासन दिया कि एलसीए के इस उन्नत संस्करण की डिलीवरी फरवरी 2024 तक शुरू हो जाएगी।
समीक्षा के दौरान सामने आई परियोजना में देरी के बावजूद, सीएएस ने सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना की तथा एलसीए कार्यक्रम से सीखे गए सबक को भविष्य की स्वदेशी डिजाइनतथा विकासात्मक परियोजनाओं में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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