
याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत द्वारा नियुक्त नोडल वकील के माध्यम से संविधान पीठ को एक नोट सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि मौखिक बहस के लिए लगभग 60 घंटे लगेंगे दूसरी ओर, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी तथा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मुख्य रूप से केंद्र के पक्ष का बचाव करेंगे। शीर्ष अदालत के समक्ष हाल ही में दायर एक हलफनामे में, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने का बचाव करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को कमजोर करने के उसके फैसले से क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास, प्रगति, सुरक्षा तथा स्थिरता आई है।
जम्मू तथा कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को चुनौती देते हुए राजनीतिक दलों, निजी व्यक्तियों, वकीलों, कार्यकर्ताओं द्वारा बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर की गई हैं, जिसने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि आतंकवादियों तथा अलगाववादी नेटवर्क द्वारा की गई सड़क हिंसा अब अतीत की बात हो गई है तथा आतंकवाद-अलगाववादी एजेंडे से जुड़ी संगठित पथराव की घटनाएं, जो 2018 में 1767 तक पहुंच गई थीं 2023 में अब तक शून्य पर आ गया है।लंबित मामले में, पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा छीनने के केंद्र के कदम का समर्थन करने वाले कश्मीरी पंडितों द्वारा हस्तक्षेप आवेदन भी दायर किए गए हैं।
संविधान पीठ के समक्ष कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया जा रहा है तथा कार्यवाही की प्रतिलिपि इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।

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